केंद्र ने मेघालय से हटाया AFSPA, अरुणाचल के कुछ इलाकों में ढील

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को मेघालय से विवादास्पद आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स ऐक्ट (AFSPA) को पूरी तरह से हटा लिया। पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मेघालय के अलावा अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों से भी इस कानून को हटा दिया गया है, हालांकि राज्य सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद मेघायल से इसे पूरी हटाने का फैसला लिया गया।

साल 2017 में पूर्वोत्तर में उग्रवादी घटनाएं 37 फीसदी तक घटी हैं और पूर्वोत्तर राज्यों में, साल 2017 से सुरक्षा के लिए तैनान जवानों की मौत की घटनाओं में 30 फीसद की गिरावट आई है साथ ही, आम नागरिकों की मौत के आंकड़े भी 23 फीसद कम हुए हैं, गृह मंत्रालय ने बताया, कि उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) का असर भी कम हुआ है। इसी के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक यह फैसला 31 मार्च से अमल में आ गया है। इसके अनुसार पूरे मेघालय से इस कानून को हटाया गया है, साथ ही असम के सीमावर्ती इलाकों के 16 पुलिस स्टेशनों और आउटपोस्ट से घटाकर 8 तक सीमित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत मदद राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया है, यह नीति 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी।

इसके साथ ही सरकार ने मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड जानेवाले विदेशियों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र के परमिट और संरक्षित क्षेत्र के परमिट में ढील दी है। इस समय अफस्पा पूरे नगालैंड, असम, मणिपुर में प्रभावी है। हालांकि, इस अधिनियम को अरुणाचल प्रदेश के तीन पूर्वी जिलों में छह महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इन जिलों में तिरप, लोंगडिंग व चांगलांग शामिल हैं, जिनकी सीमा म्यांमार व आठ पुलिस थानों के तहत असम की सीमा के सात अन्य जिलों से लगती है।

क्या है अफस्पा?

आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स ऐक्ट (AFSPA) सेना को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विवादित इलाकों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है, जिससे अफस्पा सेना व केंद्रीय बलों को ‘अशांत क्षेत्रों’ में कानून का उल्लंघन करने पर किसी को भी मारने, बिना वारंट के तलाशी लेने व गिरफ्तारी करने की ताकद देता है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना कानूनी मुकदमे से बलों को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके तहत विवादित इलाकों में सुरक्षा बल किसी भी स्तर तक शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस ऐक्ट को लेकर काफी विवाद है और इसके दुरुपयोग का आरोप लगाकर लंबे समय से इसे हटाने की मांग की जाती रही है।

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