राजस्थान पत्रिका ने ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ पर संपादकीय रिक्त छोड़कर जताया विरोध

राजस्थान की प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार-पत्र ‘राजस्थान पत्रिका’ ने अपनी संपादकीय को मोटी काली लकीरो से एक बॉक्स के आकार में रिक्त या खाली छोड़ते हुए सत्ताधारी वसुंधरा राजे सरकार जो कि विवादास्पद आपराधिक कानून अध्यादेश जो मीडिया पर प्रतिबंध लगाता है और सार्वजनिक कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करता है, के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शित किया।

समाचार-पत्र ने ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ पर संपादकीय रिक्त छोड़ने का फैसला किया, जिसे देश मे स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना अपने आप मे अनूठा है और पूरे देश की मीडिया का ध्यान आकृष्ट किया है, पत्रिका के इस कदम को सराहा भी जा रहा है। देखने वाली बात ये होगी कि इस पर सरकार का रुख क्या होगा?

संपादकीय रिक्त छोड़ने के साथ ही उसका कारण भी इस प्रकार बताया है ” आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है यानी स्वतंत्र और उत्तरदायित्वपूर्ण पत्रकारिता का दिन है। लेकिन राजस्थान में राज्य सरकार द्वारा बनाये काला कानून से यह खतरे में है। संपादकीय खाली छोड़कर हम लोकतंत्र के हत्यारे ‘काले कानून’ का पूर्ण मनोयोग से विरोध करते है।”

ज्ञात हो, राजस्थान पत्रिका एक भारतीय हिंदी-भाषा दैनिक समाचार पत्र है। यह 1956 में

‘कर्पूर चन्द्र कुलिश’ ने स्थापित किया था। राजस्थान और दिल्ली में ‘राजस्थान पत्रिका’ तथा अन्य 6 राज्यों में पत्रिका के रूप में प्रकाशित किया गया।

भारतीय पाठक सर्वेक्षण 2013 के अनुसार, ‘राजस्थान पत्रिका’ और ‘पत्रिका’ एक साथ भारत में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले समाचार-पत्रों में चौथे नंबर पर काबिज थी।

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