पतंजलि ने यूपी से पतंजलि फूड पार्क को शिफ्ट करने का किया ऐलान, अन्य कंपनियों को भी भेजी गई हैं नोटिस

योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने यूपी में लगने वाले पतंजलि फूड पार्क को शिफ्ट करने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण ने बताया, “हम इस परियोजना को रद्द कर रहे हैं, क्योंकि हमें यूपी सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने अधिक कोई विवरण दिये बिना कहा कि, कंपनी अब परियोजना को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है। हमने मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार किया है। अब हमने परियोजना को स्थानांतरित करने का फैसला किया है।” आचार्य बालकृष्ण ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि, “आज ग्रेटर नोएडा में केन्द्रीय सरकार से स्वीकृत मेगा फूड पार्क को निरस्त करने की सूचना मिली। श्रीराम व कृष्ण की पवित्र भूमि के किसानों के जीवन में समृद्धि लाने का संकल्प प्रांतीय सरकार की उदासीनता के चलते अधूरा ही रह गया। उन्होंने आगे लिखा कि, पतंजलि ने प्रोजेक्ट को अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है।” बालकृष्ण ने कहा कि, यूपी में हमने आवश्यक पूरी कार्यवाही की थी, लेकिन योगी सरकार ने पता नहीं क्यों इस परियोजना पर रोक लगाई। बालकृष्ण ने कहा कि, हम योगी जी का सम्मान करते है, उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा का भी हम सम्मान करते है। यह काम योगी जी के चलते नहीं, उनके अधिकारियों के चलते रुका है।

हालांकि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को संपर्क करने पर खाद्य प्रसंस्करण सचिव जेपी मीणा ने बताया, “अंतिम अनुमोदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा करने के लिए पतंजलि को चार महीने का समय दिया गया था। जमीन और बैंक ऋण सहित चार से पांच शर्ते हैं, जो मेगा फूड पार्क स्थापित करने वाले किसी भी कंपनी को पूरा करना होगा। पिछली अखिलेश सरकार के कार्यकाल में योगगुुरु रामदेव को पतंजलि फूड पार्क बनाने के लिए जमीन दी थी।

2016 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने योगगुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के राज्य में 2,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी थी। इसमें यमुना एक्सप्रेसवे पर 450 एकड़ में फूड पार्क की स्थापना भी शामिल थी। इसमें ग्रेटर नोएडा में 1,500 करोड़ रपये के निवेश से कृषि प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल थी। पूर्ण क्षमता होने पर इस संयंत्र में सालाना 25,000 करोड़ रुपये के उत्पादों का उत्पादन होना था। अखिलेश यादव की उत्तर प्रदेश सरकार ने इस निवेश प्रस्ताव को इसलिए तेजी से आगे बढ़ाने पर रुचि दिखाई जिससे निवेशकों को प्रोत्साहित किया जा सके और रोजगार के अवसरों का सृजन किया जा सके। इससे करीब 10,000 प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होने की संभावना थी जिससे 50,000 परिवारों को लाभ होना था।

पतंजलि के ग्रेटर नोएडा मेगा फूड पार्क सहित उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित तीन फूड पार्क के प्रवर्तकों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, मथुरा के गांव भदावल, तहसील छाता में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी ओवरसीज इंफ्रा अलायंस फूड पार्क और मिर्जापुर के बेदौली, तालुका कलवारी माफी में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी विंध्याचल अटिवो फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इनमें से मिर्जापुर और मथुरा के फूड पार्क को बीते साल दिसंबर में, जबकि बाबा रामदेव की कंपनी को इस साल जनवरी में सरकार की तरफ से इन प्रिंसिपल अप्रूवल मिला था। अधिकारी ने कहा कि, इन्होंने तय समय में जमीन का टाइटल पेश नहीं किया और परियोजना के लिए फाइनेंशियल क्लोजर नहीं कर सके।

ग्रेटर नोएडा के मेगा फूड पार्क में रोज 250 टन बिस्कुट, 750 टन आटा और करीब 1,000 टन सरसों तेल का उत्पादन होगा। इस फूड पार्क से न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में सामानों की आपूर्ति हो सकेगी बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कुछ इलाकों में भी आपूर्ति होगी। इसके अलावा पतंजलि आयुर्वेद मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में भी इकाइयां स्थापित करने की प्रक्रिया में है।

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