पति द्वारा नशे में वर्षो से किये जा रहे घरेलू हिंसा से चिढ़ी पत्नी ने लोहे की रॉड से पिट कर की हत्या

लखनऊ: कभी-कभी वास्तविक जीवन मे कुछ घटनाएं ऐसी होती है कि वो फ़िल्म सरीखी लगती है; समाज मे होने वाली घटनाएं भी फिल्मों की प्रेरणा बनती है तो कभी फिल्मों के डायलॉग वास्तविक जीवन से मेल खाते है। सोमवार सुबह नबाबों के शहर ‘लखनऊ’ में घटित घटना भी कुछ ऐसी ही है।

हिंदी फिल्म ‘मैरी कॉम’ का एक मशहूर डायलॉग है कि “कीसी को इतना भी मत डराओ की उसका डर ही खत्म हो जाये…” आज वास्तविक में चरितार्थ होती दिखी जब उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के लाल बाग कॉलोनी में 13 वर्षों से हो रहे शारीरिक हिंसा का पटाक्षेप हो गया जब 30 वर्षीय जानकी नामक महिला ने अपने 35 वर्षीय पति सुरिंदर कुमार को लोहे की रॉड से क्रूरता पूर्वक पीटते हुए मार डाला।

घटना को अंजाम देने के पश्चात जानकी मौके से फरार होने की कोशिश की किन्तु पड़ोसियों ने ऐसा होने नहीं दिया, मौके पर पहुची पुलिस ने जानकी को हिरासत में ले लिया।

जानकी ने बताया कि पति सुरिंदर शराब के नशे में अक्सर उसकी पिटाई करता था। घटना वाले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ तो गुस्से में जानकी ने सुरिंदर पर हमला कर दिया और उसके चेहरे और सर को निशाना बनाकर तब तक पिटती रही जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई। जा की ने बताया कि परिवार के अन्य सदस्य हादसे के वक़्त बरामदे में सो रहे थे। पीड़ित के पिता शिव लाल ने बताया कि सुरिंदर और जानकी की शादी 13 वर्ष पूर्व हुई थी और दोनो के तीन बच्चे भी है। जीविका के लिए दोनो निर्माण स्थलों पर मजदूरी किया करते थे।इस घटना से फिर यह साबित होता है कि घरेलू हिंसा, वीभत्स हत्या का भी रूप ले सकती है, लेकिन मूल कारणों में शराब की अहम भूमिका है। सुरिंदर को शराब की लत थी और वो नशे में अक्सर जानकी की पिटाई करता था। उस परिवार के दो कमाऊ सदस्य में से एक रहा नहीं और दूसरा सलाखों के पीछे है, ऐसी स्थिति में परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा? कैसे होगी उन 3 बच्चों की परवरिश? कौन करेगा सेवा परिवार के बुजुर्ग सदस्यों का?

महिलाओं को भी इस प्रकार की घरेलू हिंसाओं का विरोध करना चाहिए, परिस्थिति के अनुसार कानूनी सहायता भी लेनी पड़ी तो जरूर ले, आज अगर जानकी ने वर्षो से हो रही उस घरेलू हिंसा का विरोध किया होता या कानूनी सहायता लिया होता तो आज उसका परिवर यूँ सड़क पर न आ जाता।शराब बुरी लत है कहना और कह कर अपना पल्ला झाड़ लेना आसान है, किंतु सरकार की लचर नीति के कारण, ऐसे गरीब परिवार सड़क पर आ जाते है और फिर शुरू होता है कठिन और जिल्लत भारी ज़िंदगी का सफर। प्रत्येक दिन कमना और खाना यही उनकी दिनचर्या है।क्या इस प्रकार की घटनाओ और गरीब परिवारों में महिलाओं पर होने वाले घरेलू हिंसा से बचाने के लिए, शराब और नशे के अन्य लतों को नियंत्रित करने पर कोई नीति अपनाएगी उत्तर प्रदेश की सरकार?(स्त्रोत: PTI)

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