७% ज्यादा फीस नही और ५ साल से पहले नई ड्रेस नही: योगी सरकार ने प्रस्ताव को किया मंजूर

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार ने शिक्षा को लेकर इन दिनों कई तरह के बड़े बदलाव किये हैं, जिससे प्राइवेट स्कूल अब फीस के बारे में अपनी मनमानी नहीं कर पायेंगे।उत्तर प्रदेश के योगी सरकार ने मंगलवार को शिक्षा शुल्क में सुधार को लेकर कई बड़े-बड़े फैसले लिए। इस बात की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और भाजपा के प्रवक्ता श्री.श्रीकांत शर्मा और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री.दिनेश शर्मा ने बैठक के बाद मीडिया को दी। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर उत्तरप्रदेश में स्कूलों के लिये शुल्क नियंत्रण की नयी व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया गया।

‎सरकार ने ये कहाँ,की यूपी सरकार नया प्रस्ताव लेकर आई है, जिसका नाम है उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषक शुल्क निर्धारण विधेयक। इस प्रस्ताव के बाद कोई भी प्राइवेट स्कूल हर साल अपनी मर्ज़ी से फीस को नहीं बढ़ा पाएंगे और हर साल नये से एडमिशन फीस नहीं वसूल कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि,अब प्राइवेट स्कूलों की फीस भी सरकार के द्वारा ही निर्धारित की जायेगी और ये भी बताया,कि अब से विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और सालाना शुल्क ही लिये जाएंगे। योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रण के लिए एक समिति बनाई हैं। इस समिति में उच्च शिक्षा के मुख्य सचिव और मौलिक शिक्षा के सचिव भी शामिल किए गए हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय के वी.सी.एस.पी.सिंह भी इस समिति में शामिल किए गए हैं।

इस कैबिनेट बैठक में हुए अहम मुद्दों पर ध्यान देते हैं:

१.वैकल्पिक शुल्क के रूप मे बस शुल्क,भ्रमण शुल्क,  शैक्षणिक शिविर शुल्क तभी लिये जा सकेंगे जब छात्र इन क्रिया कलापों मे शामिल होंगे।

२.अब सालाना फीस एक साथ लेने के बजाय छमाही या तिमाही के समय ही ली जा सकेंगी।

३.पांच साल से पहले नहीं बदलेगी ड्रेस।

४.इस फैसले के बाद अभिभावकों को किसी एक दुकान से कॉपी-किताब या बैग खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।

५ अब फीस बढ़ाने के लिए स्कूल में टीचर्स के मासिक वेतन में बढोत्तरी के अनुपात के हिसाब से बढ़ाई जाएगी. साथ ही ये बढ़ोतरी किसी भी सूरत में ५-७ प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी।

६.स्कूलों को देनी होगी आय की जानकारी।

७.स्कूलों में व्यवसायिक गतिविधियां, जैसे गेस्ट हाउस, दुकानें चला रहे स्कूलों पर नियंत्रण किया जायेगा।

८.तीन बार नियम का उल्लंघन करने पर मान्यता रद्द। पहली बार नियम न मानने पर १ लाख, दूसरी बार ५ लाख और तीसरी बार नियम नहीं मानने पर मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

९.बारवीं क्लास तक सिर्फ एक बार प्रवेश शुल्क लिया जाएगा।

१०.स्कूल को किसी भी प्रकार से ली गई फीस की रसीद को देना अनिवार्य होगा।

११.इन नियमों के दायरे में सी.बी.एस.सी.और आई. सी.एस.सी.बोर्ड के सभी स्कूलों को
लिया गया हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बदलने की पूरी तैयारी कर रखी हैं। उपमुख्यमंत्री श्री. दिनेश शर्मा के मुताबिक सरकार उ.प्र.में एन.सी.ई.आर.टी.पैटर्न पर पाठ्यक्रम निश्चित करने पर गंभीरता से सोच रही हैं और शिक्षा माफियों का धंदा खत्म करने की लिये कठोर कदम उठा रही हैं। इसके साथ उत्तर प्रदेश में नए स्कूलों को यू.पी.बोर्ड मान्यता नहीं देगा। अब यू.पी.में मान्यता के लिए जब नया आदेश आएगा तब कानून और कठोर हो जाएंगे।जिसमें खेल मैदान,टी.ई.टी.और बी.एड.पास शिक्षक,शौचालय,पानी,भूकंप विरोधी स्कूल के कमरे,फीस निर्धारण,बिजली,स्कूल में बेहतर सुविधाएं समेत कई नए नियम बोर्ड से मान्यता के लिए आवश्यक होंगे।

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