आज हिंदी पत्रकारिता कहाँ है ?

आज है हिंदी पत्रकारिता दिवस ! आज के ही दिन पंडित युगल किशोर जी ने कलकत्ता से एक  साप्तहिक हिंदी समाचार पत्रिका -” उदन्त मार्दंड ” की शुरुआत की थी वह भी गैर हिंदी क्षेत्र बंगाल में और इसी तरह हिंदी पत्रकारिता का ऐतिहासिक आगाज़ हुआ | आज हिंदी भाषा जो कि जन भाषा , सम्प्रेषण भाषा , मातृ भाषा और एक समावेशी भाषा है उसकी पकड़ बाजार पे भी बनती गयी और शुरुआत प्रिंट से करते -करते वह रेडियो , टीवी , वेब और आज डिजिटल माध्यम तक बहुत तेज़ी से एक आम आदमी तक अपनी पहुंच बना चुका है जिससे वह खुद भी पत्रकार बन के पत्रकारिता करता है |

क्या देखा आज मैंने ?

कल रात को आधा मन पहले ही बता चुका था कि हे यार ! कल कोई भी समाचार पत्र , टीवी न्यूज़ चैनल ,रेडियो चैनल ,वेबसाइट को छोड़ के हिंदी पत्रकारिता की बात अपने प्रथम पृष्ठ पर तो बिलकुल नहीं करेगा लेकिन दूसरे हिस्से ने कहा कि कम से कम संपादकीय में उसका उल्लेख होगा लेकिन नहीं फिर भी शायद कहीं उम्मीद थी कि ऐसा हो या कम से कम 31 मई को आएगा | तो उठा तो बड़े पापा के घर पर देखा शहर का प्रतिष्ठित अखबार दैनिक जागरण जिसमे कहीं भी हिंदी शब्द तक का ज़िक्र तक नहीं था , फिर शाम को तपोवन पार्क में राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता महासंघ के कार्यक्रम से हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाकर लौटा तो देखा अमर उजाला , चेहरे पर उम्मीदभरी चमक आयी पर आखिरी पन्ने तक को पलट लेने के बाद एहसास हुआ यह लोग आज कोई कर्त्तव्य नहीं सिर्फ व्यवसाय कर रहे हैं !

अफ़सोसनाक कहें या शर्मनाक ? खैर फेसबुक पर पोस्ट सर्च में देखकर दोपहर में धीरज आया कि लोग जागरूक तो है और हिंदी पत्रकारिता के पर्व को मनाया जा रहा है फिर शाम को आया कमरे पर तो केबिन की डेस्क में देखा तो गूगल करते ही सभी समाचार पत्रों के वेबसाइटएस पर हिंदी पत्रकारिता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था | फिर kuch samay पहले की खबर याद  आयी  जब सरकारी  फरमान  को वापस  liya  गया  था जो कि था नई मीडिया यानी इंटरनेट पत्रकारिता के माध्यम से संचालित खबरों के अभिवेचन का और क्यूंकि सारे समाचार माध्यमों पर कैद की ज़ंजीरें पड़ चुकी है – राजनीती पार्टियों , मालिकों , धन्ना सेठो , सम्पादको , सोये हुए पाठको /दर्शको द्वारा जो सिर्फ एजेंडा ,मसाला ,तड़का ,फेक न्यूज़ और दुनिया भर का अनरगलाप चाहती है | प्रिंट से उम्मीद ख़त्म , टीवी तो पहले से एजेंडा पर सेट है ,रेडियो सरकारी जागीर है और बचने वाला चौथा मीडिया -नई मीडिया ही आखिरी जश्न -ए-बिंदु बना जिससे हिंदी पत्रकारिता दिवस पर लेख पढ़े भी और खुद आपके लिए लिख दिया | इसलिए इस माध्यम की अभिवेचना के विरुद्ध आवाज़ उठी क्यूंकि इससे नागरिक भी पत्रकारिता करता है ! इसमें भी अपने ऐब है लेकिन कम से कम यह आज़ाद तो है ! उम्मीद है बाकी सब भी इतने आज़ाद तो हो जायेंगे कि अपने धर्म – हिंदी पत्रकारिता को याद करें , उसे जिए और जश्न मनाये ! सभी लोग इसी उम्मीद से साथ तो आए !

जय हिंदी ! जय हिंदी ! जय पत्रकारिता !

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram