‘आरती’ : भाग 1 – आखिर तुम हो कहाँ ?

हाँ ! पवन आरती को ढूढ़ रहा था| हाँ वह उसे ही ढूंढ रहा था ! उन्हीं बरसाने के जंगलो में जहाँ कॉलेज के दिनों में छुपते -छुपाते दोनों मिला करते थे| बात साल 1995 की है , दोनों के ग्रेजुएशन का आखिरी वर्ष और प्यार का वह अनोखा इज़हार जो हुआ मात्र आँखों की अदायगी से| पवन बीते समय को सोचते -सोचते वहां जैसे ही पहुंचा है तो उसके मस्तिष्क के मानचित्र से यादें ओझिल हो जाती है | इसकी वजह थी वह टूटा हुआ सफ़ेद रंग का बेंच जिस पर बगल के एनी बेसेंट गार्डन के माली से रोज फूल उधारी पर खरीद कर पवन ले आता और बेंच पर उसका एक बिछौना बना डालता अपनी दिलरुबा आरती सचदेवा के लिए और दोनों उसी भर बैठकर घंटो एक दूसरे को देखा करते , वह शर्माती तो वह उसके बालों में मदहोशी में ग़ुम होते उसे सहलाने लगता|

पर आज वो बेंच थोड़ा ही बचा है , बाकी टूट जो गया था| पवन रोने लगता है और वह जायज़ भी था वो बस कुछ दिन अस्पताल क्या चला गया तो लोगों ने उसके प्यारे बेंच का ख्याल नहीं रखा| उसे टूटने दिया ! अब वह क्या करे ? वह ज़मीन को पीटते हुए रोता है ,थोड़ा चीखता है और आरती को आवाज़ देते हुए आखिर कह ही उठता है कि -आखिर तुम हो कहाँ ? वो दर्ज़नो बार यही कहते हुए चिल्ला उठता है , चिल्ला-चिल्ला कर उसका गाला रोंधा हो जाता है , उसकी आँखें सुख जाती है ,अश्रुओं का जमाव हो जाता है लेकिन वह फिर भी पूछता रहता है

“आखिर तुम हो कहाँ आरती ? ” तुम मुझसे अस्तपाल में मिलने भी नहीं आई ! तुम्हारे बिना जी नहीं पा रहा हूँ , देखो मेरे साथ प्रैंक मत करो समझी मैं थप्पड़ मरूंगा तुमको ,समझी तुम

जल्दी आओ यहाँ बस| बाबू तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा हूँ अब आ भी जाओ न , रोते हुए वह उसी ज़मीन पर बेहोश हो जाता है तभी आसमान की हवाओं से आवाज़ उसके कानो तक पहुंच ही जाती है जिसमे लिखा रहता है ” अब मैं नहीं आ सकती हूँ पवन ,तुम्हारी आरती तुम्हारे पास तो है पर तुम्हारे साथ नहीं!” कृपया ज़िन्दगी की इस हकीकत को जानो ,मैं अब नहीं हूँ |

पवन होश में आ जाता है वो जवाब देता है -“आरती तुम झूठ कब से बोलने लगी ? तुम झूठ बोल रही हो …पर क्यों बोल रही ? ” आरती बोलो ! आरती बोलो ? आरती कहाँ हो तुम ? आरती को पुकारते हुए वह बरसाने के घने कोहरेवादी जंगलो में चला जाता है जहाँ फिर से आवाज़ आती है -“यहाँ पहुंचो तुम , तुमको तुम्हारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे पवन , आई लव यू ” आरती ! पवन कहते हुए उस आवाज़ के पीछे चलने लगता है|

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