”प्रेम गली अति सांकरी रमे”

राम अगर मैंने सब कुछ सोचा समझा होता न तो बेहतर रणनीतिकार की नौकरी बजा रही होती। वैवाहिक गठबंधन हो या राजनितिक गठबंधन, आजकल इस प्रोफेशन में मुँहमाँगी रकम मिलती है और एक दो सफलताएं मिल गई तो बस, आप कौन, मैं कौन? पर मेरा क्या, पूछा नहीं न तुमसे, दिल लगा बैठी। प्लानिंग नहीं की न। इवेंट नहीं था ना राम सो वेन्यू और मुहूर्त भी नहीं देखा। तुम अब इन बूंदों को H2O का फॉर्मूला बता के ख़ारिज कर देते हो। तुमसे बेहतर तो मैं नितांत अकेली ही थी। कम से कम इस खारे पानी से रोज अभिषेक तो न करती थी खुद का। वैक्यूम ही कर गया है तुम्हारा इश्क़ मुझे।

रमा, रमा ,रमा वेट तुमने तो एक बार कहा था, समय पर भोजन लिया जाये तो गैस नहीं बनती।

चुप भी करो साहिबा, बस ठिठोली आती है।

मैं तो हर बार कहता हूँ रमे, मैं बेकार, बेकाम की चीज हूँ। अच्छा होता जो समय ले सोच समझ लेती जानने समझने का मुझे।

हाँ-हाँ क्यूँ नहीं, तुम इत्तला करो फिर मैं शोध करूँ और इस निष्कर्ष पर पहुंचू कि, अब मुहब्बत की जाये या नहीं और गर की भी जाये तो समय की सीमा कितनी हो और जगह। हाँ जगह भोगौलिक सीमाओं का भी ध्यान रखा जाये। .

बैठो मेरी जान रमे, तनिक शांत हो जाओ। क्या फ़र्क है फिर सबमें और रमा होने में। सब की तरह रोने-धोने में। हम सहयात्री हैं। रोना हो तो सन्देश भेज दिया करो, आ जाऊँगा। जी भर के गंगा-जमुना बहा लेना। देख भी लूँगा कैसी लगती हो और सूखाग्रस्त राज्यों की तरफ धाराओं का रूख़ भी कर दूंगा। अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए ही होने वाला है। सेव वॉटर रमा। एनीवे would you like to eat something?

नहीं प्रिये तुम्हें वैसे भी कुछ नहीं आता। लाओ मैं बनाती हूँ। बारिश है, पकौड़े बनाते हैं और गर्मागर्म चाय। तुम्हें पसंद भी है न।

राम जरा मुझे देखो प्याज इतना भी महंगा नहीं कि इसको टोकरी में उठाने मात्र से आँखों में पानी आ जाये। यार प्याज कटने से पहले आँखे नम होती हैं, पहली बार देखा है।

जितना समय तुम हमसे मिलने में जाया करती हो, कुछ लिख पढ़ लो। यही जीवन का सार है। हां बात सही भी है तुम्हारी। हम साइंस का क्लास कभी अटेंड नहीं किए। कम से कम तुमको समझे बुझेंगे तो केमेस्ट्री का ज्ञान बढ़ेगा। सबसे जटिल विषय मुहब्बत में पढ़ा जाए तो रामायण तो लिख ही डालेंगे। क्या हुआ कि हम रत्नावली के तुलसी नहीं, राम की रमा तो हैं।

मेरी प्यारी रमा जरा पनीली आँखे रखो न तो, रौशनी उम्दा होती है और काली घटाएं ये जो तुम्हारी जुल्फें हैं न, इनसे तुम्हारा ”जमाले ए रूख़ ” साफ़-साफ़ नज़र आता है।

सॉरी साहिबा, मैं बहुत बोलती हूँ न।

रमा मेरा दिल ऐसे ही सफोकेटेड है तुमसे, सॉरी की जगह नहीं है । एंड आई होप की congestion तुम्हारे दिल में भी उतना ही होगा, you can not keep it back too.

प्रीत है ही ऐसी सहज साज़िश की रच भी जाये और दिल में आने-जाने के सारे दरवाजे आप ही बंद हो जाएं। फिर chemistry, geography, के मायने नहीं होते।

हर बार तुम कुछ कहती हो न, मैं भी तो वही कहता हूँ, ”प्रेम गली अति सांकरी रमे”

“बेवजह है तभी तो मोहब्बत है !

वजह होती, तो साजिश होती !!”

Fb wall – Pankaj Kapadia

To be Continued…

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