एल्बम

लगातार सात दिनों की बारिश के बाद नम चादरों और लिहाफ़ों को जरा धूप दिखाने गई थी शालू छत पर। तभी खुले संदूक पर वासु की नज़र पड़ी और लाल मखमली कपड़े मढ़ा, चारों किनारों पर सुनहरे तिकोने से बंद फोटो एल्बम दिखा। उसने झट से एल्बम उठाया और अपनी टाई को यूं ही गले में अधबंधा छोड़ आवाज़ लगायी।

अरे वाह शालू अपनी शादी का एल्बम। आज दस मिनट लेट ही जाऊँगा ऑफिस, सारी मीटिंग्स सेकंड हॉफ में रखी हैं। आओ जरा पास बैठो साथ देखते हैं।

अभी ६ महीने ही हुए थे शादी के दोनों के। यूपी के उम्दा शहर बनारस से अभी अभी मुंबई आये थे। वासु की ये पहली नौकरी थी। इवेंट मैनेजमेंट जैसे जॉब में होने की वजह से ऑफिस का टाइम जरा फ्लेक्सिबल था। और वासु खुले विचारों का भी। अच्छा सा घर मिला था मुंबई में। सामने एक छोटा सा खुला पैसेज जहाँ सुबह की पहली किरण वहां रखे तुलसी के पौधे को चूमती। कमी न खली थी शालू को बनारस की। किसी की दीदी, किसी की बिटिया और किसी की भाभी भी हो गयी थी शालू कुछ ही महीनों में। नए शहर में सम्बोधन वाले रिश्ते अपनेपन का एहसास दिलाने लगते हैं।

सुंदर, सुशील शालू वासु का पूरा खयाल रखती और वासु भी तो दिन में अपनी मीटिंग्स से फ्री होते ही उसको फोन कर लेता। खाना खाया कि नहीं, तनिक आराम किया या नहीं। अपनी मम्मी से बात जरूर कर लेना। शाम को जल्दी आऊँगा कहीं बाहर चलेंगे। डिनर मत बनाना वगैरह।

अभी वासु एल्बम खोलने ही वाला था कि शालू ने बड़ी तेजी से उसके हाथ से खींच लिया। अरे रे क्या कर रही हो शालू फट जाएगी। मुझे पता है तुम चाहती हो मैं ऑफिस में लेट ना जाऊं। गूगल जी ने बता दिया है ट्रैफिक कम है। और यूं भी जरा लोग समझ लेते हैं नई-नई शादी हुई है बंदे की। मुझे तो अपनी फोटोज में हम दोनों के अलावा और भी चेहरे देखने थे। किसी का मेकअप, किसी का एक्सप्रेशन, और सबसे मजेदार खाते हुए लोगों की तस्वीरें।

वासु ये शादी का एल्बम नही। ये हमारे मायके की यादें हैं। कभी फुर्सत में बताऊंगी।

अभी तो तुम बस घाट-घाट कूदो मत। तैयार हो जाओ। तुम्हारी चाय भी तैयार है। जल्दी निकलो तो मैं भी घर के थोड़े काम निपट के जरा सो लूँ। कल बगल वाली आंटी बता रहीं थीं, यहाँ नीचे के फ्लैट में कोई नया शिफ़्ट हुआ है। हमारी तरह newly मैरिड हैं, और बनारस से ही। आज मिलने जाऊंगी आंटी के साथ। एक दो दोस्त बन जाये वासु तो अच्छा लगेगा। और यूं भी मैं एक बार कहीं ज्वाइन कर लूँ तो फिर इतनी बोरियत भी नहीं होगी। तुम ऑफिस जाते हो तो मैं बिना काम के काम निकाल ही लेती हूँ। या फिर घरवालों से बातें। मम्मी की नसीहतें, बेटा अब वो घर तुम्हें बनाना है। खूब अच्छे से रहना तुम खुश रहोगी तो हमलोगों का सब पूजा- पाठ सफल होगा। और ससुराल में बात तो वासु, जाने दो जाओ। शालू क्या हुआ बोलो ना। अरे नहीं यार तुम्हारा मन खट्टा हो जायेगा सुबह सुबह। कभी ये नहीं पूछते हैं कैसी हो शालू। मुआ व्हाट्सप का विडियो कॉल भी मुसीबत है। देखते ही चेहरे का पूरा भूगोल पढ़ लिया जाता है। लगता है सोई थी, प्रणाम पाती बोलूं उसके पहले दूसरा सवाल बिंदी नहीं लगायी हो क्यूँ ? अगर कह दूँ मम्मी जी जल्दी जल्दी में रह गया था। पूरी बात सुने बगैर फिर से बहू इसी जल्दी जल्दी में वासु का लंच मत पैक कर दिया करना। वासु को लौकी नहीं पसंद है और करेला तो बिलकुल भी नहीं। नाश्ते में ब्रेड व्रेड मत देना, ये सब हमलोगों के घर का रिवाज़ नहीं है। हाँ बारिश है वहां तो शाम को उसके ऑफिस से आने के बाद ब्रेड पकौड़े बना देना। वो हमारे पूरे परिवार को हरी चटनी और चाय के साथ पसंद है। चटनी पीस के पहले ही रख लेना, मिक्सर की आवाज से वासु बहुत irritate होता है।

कल तो हद हो गई वासु तुम्हारी मम्मी का विडियो कॉल मैंने आधी नींद में ही उठा लिया कहने लगी, ये तो वही सूट है ना जो वासु की दीदी जयपुर से लायी थी। इसका दुपट्टा कहाँ है ? वही तो इस सूट की पहचान है। और वहां क्या बिना दुपट्टा के ही रहती हो ? चूड़ियां क्यों निकाल दीं ? शहर में लोग नहीं पहनते क्या चूड़ी ? कम से कम सवा साल तो पहनें रहती। हम तभी कह रहे थे हनीमून मना के शालू को ससुराल में ही एक साल रहना चाहिए। सब रीति-रिवाज़ से परिचित हो जाती। वासु जैसे इतने दिन अकेले रहा है और छ-आठ महीने रह लेता। बीच में हम और उसके पापा चले आते बम्बई। देखना भी हो जाता वासु को और हमलोग साथ-साथ घूम भी आते। चलो अब जो हो गया सो हो गया सब महादेव की मरजी ही रही होगी। जवानी सास-ससुर की सेवा में निकल गया बुढ़ापा बाल-बच्चों की खुशियों की भेंट चढ़ जायेगा। और कान में ये कौन से बूंदें डाले हैं। नए लिए क्या ? ऐसा तो तुम्हारे मायके से नहीं आया था। हमने जो तुम्हें चढ़ाए थे सब लॉकर में डलवा दिए हैं। कल ही वासु के पापा बैंक हो के आये। सब हैं तुम्हारे पास, अभी सोच समझ कर ही खरचना। अभी नई नई नौकरी है वासु की। सुबह जरा हलके हाथ झाड़ू लगा लिया करना शालू। लक्ष्मी का वास होता है घर में। और नहा तो सुबह ही लेना, अपनी परंपरा निभाते रहना। शाम की धूप मत भूलना। कर्पूर जला के दोनों रूम में दिखा देना। शंकर की नगरी वाले हैं हम बिना उसके घर की पूजा-अर्चना पूरी नहीं होती, और हाँ मच्छर वच्छर की परवाह किये बगैर शाम को दरवाजा खुला रख के ही साँझ देना। लक्ष्मी का आगमन होता है। अभी तुम्हारे कर्मों का फल ही वासु का मार्ग बनाएगा। घर की बड़ी बहू हो परम्पराओं पर खरा उतरना तुम्हारा दायित्व है। तुम्हारे पापा से हम संस्कार पर ही प्रभावित हुए थे। कहे थे तुम्हारे पापा घर से कॉलेज और कॉलेज से घर के अलावा बेटी का तो कोई नाता नहीं। आजकल के जमाने जैसा फेसबुक और व्हाट्सप्प पर नहीं है हमारी बिटिया। हमको भी तो अभी अभी वासु की दीदी ने सब सिखाया है। कल ही फेसबुक पर भी मेरा फोटो डाल के सब बना दिया। देख लेना वासु आएगा तो। तुमलोगों की शादी में मेरा फोटो बहुत ही अच्छा आया है। चलो बहुत बात हो गयी ये सब मोबाइल का जमाना जो न कराये!

वीकेंड की छुट्टी थी वासु की. शहरों में काम करने वालों के लिए वीकेंड वरदान की तरह होता है. नींद थोड़ी लम्बी खींचती है और बातें भी. मगर वासु आज जल्दी उठ गया था और चाय बना बना लाया था. डाइनिंग टेबल पर उसने चाय का कप रखते हुए शालू को आवाज़ लगायी। “अरे शालू, वो शादी का एल्बम तो लाओ ना. आज गरमा-गरम चाय के साथ यादें ताज़ा करते हैं. पिछली बार तुमने टाल दिया था. और, उस दिन कह रही थी कि ये शादी का एल्बम नहीं, मेरे मायके की यादें हैं. कभी फुर्सत में बताउंगी. लो भाई, आज मौका भी है और फुर्सत भी। और हाँ आज फिर उस दिन की तरह अपने शादी के पहले की तस्वीरों को दिखाने की बजाय अम्मा को ले के मत बैठ जाना। माँ थोड़ी पोजेसिव रहती है मुझे ले के पर तुम इस चीज को ब्रॉडली हैंडल करो ना शालू। तुम पढ़ी लिखी हो कर इतनी ऐसी बातें करोगी तो तुम्हें ही तकलीफ होगी।

शालू के एल्बम का पहला पन्ना पलटते ही वासु एकदम से शालू को अपनी बांहों में भर लिया।

वाह शालू तुम कितनी सुन्दर लग रही हो इस तस्वीर में। और ये वही है न तुम्हारी प्रिय सखी प्रिया, जिसने शादी में सभी बारातियों का दिल भी चुराया था जूते के साथ। वैसे है तो प्रिया भी बेहद खूबसूरत। वासु ने शालू को थोड़ा छेड़ा।मगर शालू तो एल्बम में ही खोयी थी.

शालू का ध्यान तब टूटा जब वासु ने आगे कहा “ओह ये लगता है किसी पिकनिक की तस्वीर है और ये कौन है जो तुम्हारे चेहरे पर नदी का पानी उछाल रहा है।”

“पिछली तस्वीर में भी ये लड़का था न, तुम्हारे ठीक बगल में बैठा हुआ।

और ये ग्रेजुएशन सेरेमनी की फोटो है, शालू ने बड़ी ही सहजता से कहा।”

अरे वाह इसमें सभी कितने खुश है और शालू ये फिर वही लड़का है न जिसने अपनी कैप तुम्हारे सर रख के अपनी खुशी जाहिर की है।

तुम्हारे खुले बाल हवा से उसके कंधे पर जा बिखरें हैं।

शालू पूरी तरह वासु के व्यंग और तल्ख़ आवाज को महसूस कर रही थी। वासु जो शालू को छेड़ने के चला था अब अंदर ही अंदर उसके कुछ छिड़ चूका था. वासु ने कहा “अरे ये तो तुम्हारा जिगरी लग रहा है, हर तस्वीर में तुम्हारे पास है.” शालू ने बात को काटते हुए कहा , हाँ तो? तुम्हें जलन हो रही है क्या ? वैसे नील, नील नाम है इसका। हमारे बैच में सबसे एक्टिव, सबसे intelligent और सबका चहेता भी था नील। सभी इसके दोस्त बनना चाहते थे वासु। हमारी शादी में आया तो था नील, शालू ने चहकते हुए कहा। उसने हमारी पसंद के रंग का शर्ट भी पहना था। याद है वासु वो आर्किड के फूलों का गुलदस्ता, वो नील ही लाया था। एक ही सांस में शालू सारी बात कह गयी.

वैसे तुम्हें कैसे लगता था नील? Active, intelligent और तुम्हारा चहेता? वासु की आवाज़ में कटाक्ष साफ़ था, जो शालू को तीर की तरह चुभ रहा था. उसने कभी सोचा न था कि वासु इन कॉलेज की तस्वीरों को देख ऐसे react करेगा। शालू को ब्रॉडनेस का पाठ पढ़ाने वाला वासु, अब खुद ही पूरी mean हो चूका था और असहज भी. असहज इस हद तक कि वो अपने आप को अपराधी सा महसूस करने लगी थी. दोनों चुप रहे.

चुप्पी तोड़ी वासु ने, जब उसने घर का दरवाजा खोला और बाहर जाने लगा. शालू ने पूछा, कहाँ जा रहे हो तो वासु ने टालते हुए कहा, एक ज़रूरी सा काम था, आता हूँ. शालू चुप रही. उसके मन में कई तरह के ख़याल आ रहे थे. इधर वासु एक लम्बे वॉक पे निकल गया था… ख़ुद से ही बात करता हुआ “सचमुच, शालू?” जिस लम्बे वीकेंड का शालू और वासु को इंतज़ार रहता था वो अब और लम्बा हो चूका था और दोनों अपने-अपने तरीके से चाहते थे कि कैसे ये जल्दी से बीते।

इसी उधेड़-बुन में शालू थी कि बेल बजी. शालू ने सोचा वासु लौट आया है. मगर दरवाजा खोला तो देखा कि सामने उसकी सहेली प्रिया और नील खड़े हैं. जिसको देख के लग रहा था कि उसकी अभी-अभी शादी हुई है. शालू को विश्वास ही नहीं हुआ कि प्रिया और नील कैसे आये यहाँ? नील और प्रिया भी हैरान थे शालू को देखकर, मगर प्रिया ने सहजता से कहा, “मुंबई में मेहमानों को दरवाजे पे ही खड़े रखते हैं क्या शालू?” शालू जैसे नींद से जागी हो, तुरंत उसने प्रिया को बाहों में खींच लिया और घर के अंदर भी. ख़ुशी से पागल हो रही थीं दोनों सहेलियां और नील भी हैरान था, अपने प्रिय फूल आर्किड के गुलदस्ते के साथ.

शालू ने पूछा “ये बता कि यहाँ कैसे पहुंचे?” तो प्रिया ने कहा “यार मुझे किसी ने बताया कि बनारस से एक और कपल हैं, जो हाल ही में शिफ्ट हुए हैं यहाँ। तो सोचा, चलो मायके से कोई तो है, जान ही लेते हैं. सिक्योरिटी ने थोड़ी और मदद कर दी तो हम बस ‘हाय-हेलो’ कहने चले आये. मुझे क्या पता था कि तुम मिलगी मेरी जान!”

नील जो अबतक चुप था, पूछा, “शालू, वासु दिखाई नहीं दे रहा?” शालू फूलों को वास में रखते हुए बोली, शुक्रिया. जो नील के सवाल का जवाब नहीं था. ज़ाहिर था कि शालू उस सवाल को टालना चाहती थी. तभी प्रिया की नज़र पड़ी एल्बम पर तो उसने प्यार से शालू को चिढ़ाया “मैंने तो सुना था कि लोग मुंबई में वीकेंड्स पर नयी-नयी मूवीज देखते हैं, अच्छा लगा जानकार कि कुछ लोग अभी भी हैं जो अपनी पुरानी यादों का एल्बम देखते हैं.” और कहकर हंसने लगी. शालू, ने उसे उल्टा चिढ़ाया “तेरी अभी भी दांत दिखाने की आदत गयी नहीं। चल, चाय बनाते हैं.”

तभी वासु की आवाज़ आयी “शालू, तुमने बाहर का दरवाजा क्यों खुला छोड़ा हुआ है. “ताकि आपके दोस्त आपके घर आ सकें।” ये नील की आवाज़ थी. वासु, नील को अपने ड्राइंग रूम देखकर हैरान था. अंदर आया तो देखा प्रिया भी है. वासु को समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब हुआ कैसे? नील से हाथ मिलाते हुए वासु ने कहा “ये तो मामूली सरप्राइज नहीं है.”

“ऑफ़ कोर्स माय फ्रेंड! मीट, माय वाइफ एंड लाइफ प्रिया और माय बेस्ट फ्रेंड शालू, जिसने हमें मिलवाने के लिए क्या-क्या नहीं किया.” नील की इस बात पर सब हंसने लगे. पल में ही वासु के मन के मैले बादल छंटने लगे थे. वो क्या सोच के बैठा था और बात क्या निकली. प्रिया ने वासु को चुप देख पूछा “क्या आपके मन में भी वही सवाल उठ रहे हैं?” अचानक, वासु को लगा उसकी चोरी पकड़ी गयी है. उसने कहा “कैसे सवाल?” “वही कि, हम यहाँ कैसे, वासु साहब, बड़ी लम्बी दास्ताँ हैं. पहले चाय पीते हैं फिर….” नील सोफे पर पसर कर बोला!

शालू चाय बनाने के लिए उठने लगी तो, वासु ने बीच में ही टोका “चाय तो मैं पिलाऊंगा डिअर एक्टिव, इंटेलिजेंट और सबके चहेते नील।” शालू को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये वही वासु है जो कुछ देर पहले नील के नाम से चिढ़ रहा था. वासु ने शालू को देखा और शालू ने वासु को…. फिलॉस्फर की तरह कहने लगा “नील, एक बात समझ में आयी, जब हम किसी को चाहने लगते हैं न तो हम उसके लिए सिर्फ़ वही तस्वीर दिल में बसाते हैं जो हम चाहते हैं. हम भूल जाते हैं कि उसकी और भी नयी-पुरानी तस्वीरें हो सकती हैं जो बेहद खूबसूरत होती हैं।

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