नयी पीढ़ी के साथ समाज को लौटाने की मुहिम शुरू

अपने लिए तो सभी जीते है, समाज के लिए कुछ करना व दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना और बदले में कुछ उम्मीद नहीं करना, ऐसे विरले ही होते है। इन्हीं विरलों में से एक नाम है ‘ए. डी. सिंह’। समाज की बेहतरी की आस और इसके लिए सतत प्रयास, यह ‘आस-प्रयास’ ही उनके जीवन का सार है। उनको देखकर बरबस ही मुख से निकल पड़ता है;

“निखरती है मुसीबतों से ही शख्सियत जनाब ! जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का !!”

With ex DGP Abhayanand, Pankaj Sir and students

ऊपर लिखी बातों को उन्होंने ‘उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन’ की स्थापना करके चरितार्थ कर दिया है। आज इस ट्रस्ट के द्वारा निर्धन एवं जरूरतमंद परिवार की लड़कियों की शिक्षा, शादी से लेकर ना जाने कितने ऐसे पुनीत कार्य है, जिसे इस छोटे से लेख में समेट पाना मुमकिन नहीं है। इन्ही कार्यों में से एक है, ‘अभ्यानंद सुपर 30’। यह संस्थान ट्रस्ट का ही एक अभिन्न अंग है, जिसमे सुविधावंचित छात्रों को देश ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे कठिनतम प्रवेश परीक्षाओं में से एक IIT की तैयारी करवाते है। इसका मार्गदर्शन बिहार के पूर्व डीजीपी एवं ‘सुपर 30’ के संस्थापक अभ्यानंद करते है। स्थापना के बाद, पहले ही बैच में 22 बच्चों में से कुल 19 बच्चे न सिर्फ सफल हुए बल्कि गुवहाटी जोन का 3रा और 5वां टॉपर यहीं से था। तो समाज को इतना कुछ देने वाला शख्स आखिर है कौन ? जैसा की हम सभी जानते हैं कि “मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।” अरस्तू की कहीं इन पंक्तियों में इंसानी फितरत और मजबूरी दोनों का ही पुट हैं। समाज इंसानों से बनता है और इंसानों से समाज बनता है, इंसानों के विकास से समाज का विकास होता है और समाज के विकास से इंसानों का विकास होता है। यदि हर विकसित इंसान समाज के विकास में अपना योगदान दे तो समाज के अन्य लोगो को भी उसका लाभ मिलेगा, ऐसी सोच से सामाजिक असमानता मिटेगी एवं एकीकरण की राह पर आगे बढ़ेगी। हमारी सभ्यता में समाज को वापस करने की सोच बहुत ज्यादा चलन में नहीं है, उन्होंने ऐसी सोच को चलन में लाने के लिए खुद ही इसकी बुनियाद रखी, आइए गवाह बनते है एक ऐसे सफर का जिसमे सोच है, दृढ़ता है, त्याग है, टीम है, प्रयास है, सफलता है और सबसे बढ़कर परिणाम भी जिससे कि उज्ज्वल समाज की उम्मीद है। ए. डी. सिंह का जन्म बिहार राज्य अंतर्गत पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के ‘एनखां’ गांव में हुआ है। अधिवक्ता व लेखक पिता और गृहणी माता ने उनकी परवरिश में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा, अच्छी शिक्षा व अच्छे संस्कारों के साथ सब कुछ देने की कोशिश की, ताकि उनके व्यक्तित्व निर्माण में कोई कमी नहीं रह जाये। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना के संत माइकल्स स्कूल में हुई और उसके पश्चात उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक, दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया। अपने पढाई के दौरान ही तय किया कि जॉब नहीं करके कोई व्यवसाय करेंगे और खुद के साथ अन्य के लिए भी रोजगार का अवसर बनाएंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने एक कंपनी की नींव रखी जिसके अंतर्गत आयात-निर्यात एवं ट्रेडिंग आदि कार्य करते है। आज उनके द्वारा स्थापित मि हुई कंपनी का कारोबार सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैला हुआ है, बहुत कम समय में ही ए. डी. सिंह ने अपनी दूरदृष्टि से इस कंपनी को एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में तब्दील कर दिया। अपने कामकाजी दौरों एवं शौकिया यात्रा के कारण उन्होंने विभिन्न देशों का भ्रमण किया, वहाँ की सभ्यताएं देखी, रीति-रिवाज देखा-सीखा और लोगो की सोच, सामाजिक निष्ठा, सामाजिक कृतज्ञता और समाज को लौटाने या समाज के लिए कुछ करने की प्रवृत्ति देखी। समाज को वापस करने की सोच ने उनके अंतर्मन को छुआ और उन्होंने इसे आत्मसात करने का निर्णय लिया। कारोबारी जीवन में कुछ स्थायित्व आया तो उन्होंने समाज के लिए कुछ करने की सोची, उनकी इसी सोच का परिणाम है ‘उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन’। किन्तु अपनी इस महत्वकांक्षा के मूर्त रुप देने के लिए अपना पूरा जीवन ही इस सोच को समर्पित कर दिया। हमारे प्रतिनिधि से बात करते हुए ए. डी. सिंह ने बताया कि

“मैंने काफी यात्राएं की है, पाश्चात्य सभ्यता को नजदीक से देखा, उनकी समाज को लौटाने की प्रवृति देखी जोकि हमारे यहां दुर्लभ है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य समाज से जो कुछ भी हासिल किया है, उसे समाज में खुद तो वापस करना ही है और आने वाली युवा पीढ़ी को सिखाना भी है।”

With Abhayanand Super 30 students

अपनी तमाम व्यवसायिक व्यस्तताओं के बाबजूद वो ट्रस्ट की गतिविधियों का अवलोकन करने के लिए वक़्त निकल लेते है। नियमित अंतराल पर ट्रस्ट में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोगो को ट्रस्ट द्वारा संचालित केंद्रों पर गतिविधियों में शामिल कर उनका मार्गदर्शन, सलाह आदि से संस्था को श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रयास करना। इतनी कम समयावधि में आशातीत सफलता उनकी व उनकी पूरे टीम के अथक प्रयास की कहानी बयां करती है। भविष्य में ट्रस्ट का कार्यक्षेत्र का दायरा अन्य विभिन्न क्षेत्रो में भी बढ़ाने की योजना है। आज का रिपोर्टर सलाम करता है ए. डी. सिंह को जिन्होंने समाज के बारे में, कल के भविष्य युवा पीढ़ी के बारे में सोचते हुए इस प्रकार की पहल की, बिहार के प्रमुख शिक्षाविद, पूर्व डीजीपी व सुपर 30 के संस्थापक अभ्यानंद जी को जिन्होंने उनके इस विचार को अपने मार्गदर्शन मे साकार कर दिखाया व ‘उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन’ के हर सदस्य को जो अपने ट्रस्टी के सामाजिक एकता वाले पहल में साथ है। अंत में, दो पंक्तियां

“बंद मुट्ठी की तकदीर क्या है, हाथ खोले तो मिलती दुआ है।”

इसलिए जागिये, समाज के ऋण को लौटने की कोशिश करे ताकि वो किसी सुविधावंचित, जरूरतमंद की पूंजी बन सके।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram