बढ़ते कदम-बढ़ती भागीदारी, देखे सारी दुनिया- नारी सफलता तुम्हारी

लोकतंत्र की ताकत जनता होती है और जनता की ताकत उसका मत होता है। लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में यही मत निर्णायक होता है। वैश्वीकरण के कारण चुनावों के स्वरूप में भी काफी बदलाव आया है, पूर्व में जहाँ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका प्रमुख होती थी वहीं वर्तमान समय में डिजिटल/सोशल मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। 2014 के लोकसभा चुनावों में डिजीटल वर्ल्ड के प्रभाव और भूमिका ने एक नया कीर्तिमान बना दिया, युवाओं की भागीदारी एवं सोशल मीडिया के प्रभाव ने जादू सा किया और जादुई आंकड़े देखने को मिले। अब तो विभिन्न राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया पर प्रमुखता से फोकस करते है। डिजिटल वर्ल्ड किफायती एवं प्रभावशाली ढंग से सूचनाओं का प्रसार करती है और उसकी यही विशेषता विभिन्न राजनीतिक दलों को आकृष्ट करती है। लोकतंत्र के इस महापर्व में होने वाले खर्च एवं असीम संभावनाएं विभिन्न स्किल्ड लोगों के लिए अवसर लेकर आती है, हालांकि पुरषो के आधिपत्य वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति नगण्य ही है और इसी बात से प्रेरित होकर प्रतिभाओं के राज्य बिहार की एक महिला ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवायी है। चुनावीं रणनीति में मतों के प्रबंधन/समीकरण में करियर बनाने का निर्णय ही उनकी उधमी सोच को दर्शाता है। आइए जानते है शालिनी शर्मा जी की कहानी, जिन्होंने गैर-पारंपरिक क्षेत्र में न सिर्फ अपने लिए संभावना बल्कि पुरुष बाहुल्य क्षेत्र में खुद की उपस्थिति से आधी आबादी की भागीदारी दर्ज करवायी।

बिहार के नक्सल प्रभावित जहानाबाद जिले के चौपहा गांव की मूल निवासी रामप्रवेश शर्मा व मीना देवी के परिवार में जन्मी शालिनी शर्मा बचपन से ही कुछ अलग थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना के आशियाना-दीघा रोड स्थित ‘में फ्लावर’ स्कूल से हुई। बारहवीं के उपरांत करियर को लेकर असमंजस की स्थिति बन गयी थी, परिवार पारंपरिक उच्च शिक्षा के पक्षधर थे किंतु शालिनी कुछ अलग करना चाहती थी। दुविधा की इस स्थिति में शालिनी के बड़े भाई ने न सिर्फ उनका उत्साहवर्धन किया बल्कि उनके फैसले में साथ भी दिया। शालिनी ने अपने बहिर्मुखी व्यक्तित्व के अनुरूप मास-कम्युनिकेशन में स्नातक करने का मन बनाया और खुशकिस्मती से नामांकन दिल्ली स्थित देश के प्रतिष्ठित कॉलेज ‘नेशनल ब्रॉडकास्टिंग अकादमी’ में हो गया। एक नए शहरी परिवेश में समायोजन में थोड़ी असुविधा हुई किन्तु जल्दी ही सभी कुछ व्यवस्थित हो सुचारू रूप से चलने लगा। संस्थान से पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन देश की अग्रणी न्यूज़ चैनल ‘इंडिया टीवी’ में हो गया। शालिनी को वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिला, किन्तु उनकी मंजिल यह कभी नहीं थी, इस कारण उन्होंने जोखिम लेते हुए यह नौकरी छोड़ अपने सहयोगियो के साथ एक एक संस्था ‘सोच इंडिया’ की नींव रखी जिसका उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष व पुनर्निर्माण कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं/संस्थानों के कार्यो को आम जनता तक पहुंचाना था।

शालिनी बताती है” सोच इंडिया के गतिविधियों के दौरान मैंने महसूस किया कि किसी भी प्रकार का सामाजिक काम बिना सरकारी सहयोग के पूर्ण नहीं किया जा सकता, उसके लिए एक अच्छी सरकार का शासन स्थापित होना ज्यादा जरूरी है और इसके लिए जरूरत है अच्छी, कुशल और ईमानदार सरकार बनबाने में सहयोग किया जाय।”

यही वो दौर था जब देल्हिवासियो ने विधानसभा के चुनावों में अभूतपूर्व एकजुटता प्रदर्शित करते हुए समाज एवं सरकार की पूर्ण व्यवस्था को बदल देने का दावा करने वाले अपेक्षाकृत अनुभवहीन पार्टी को भारी बहुमत से जिताया। वहीं केंद्र में भी मोदी लहर के कारण बीजेपी को आशातीत सफलता मिली। उक्त दोनों ही परिणाम उम्मीद से परे थे, दोनों दलों के जितने की उम्मीद थी किन्तु इतने भारी अंतर से, कतई नहीं।

इन चुनावों के दौरान शालिनी व उनकी सहयोगियों की टीम को जमीनी स्तर पर आम जनता का मन टटोलने के दौरान उन्हें यह समझ आया कि चुनाव प्रबंधन सिर्फ चुनावीं सर्वेक्षण व मैन पावर उपलब्ध करवाना ही नहीं बल्कि इसके इतर भी है। आज भी लोग इस असीम संभावनाओं से परिपूर्ण क्षेत्र में पारंपरिक शैली व सीमित सोच से ही काम कर रहे है। बदलते दौर में यह तरीके कारगर नहीं है जिससे लोगों को मनवांक्षित परिणाम नहीं मिलते। जबकि वर्तमान दौर में आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके से जनता की राय जानना, चुनावीं आंकड़े संग्रह करना, उन आकड़ो का आकलन करना व उसके आधार पर रणनीति बनाना, ऐसे काम करने से जीत की संभावना बढ़ जाती है।

शालिनी के जीवन मे वापस यहाँ एक मोड़ आया, उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अपने महत्वाकांक्षी परियोजना ‘दृष्टिकोण मीडिया’ की नींव रखी। आज उनकी यह कंपनी युवा जोश व वैज्ञानिक सोच के साथ चुनावीं सर्वेक्षण व चुनाव प्रबंधन करती है।

शालिनी ने कहा” हमारी टीम परसेप्शन मैनजमेंट के सिद्धांत पर काम करती है जिसके अंतर्गत आम लोगों में विभिन्न वैज्ञानिक तरीको से अवधारणा निर्मित करने का अनूठा प्रयोग किया जाता है।”

शालिनी की टीम द्वारा किये गए सर्वेक्षणों के आधार पर की गई भविष्यवाणी सटीक निकली। विगत सम्पन्न गुजरात विधानसभा चुनावों में सभी सर्वेक्षण एजेंसियों ने भाजपा को भारी अंतर से विजयी घोषित किया था, वहीं दृष्टिकोण मीडिया ने अपने सर्वेक्षण के आधार पर भाजपा को 100 सीट के आस-पास बताया था। वर्तमान में दृष्टिकोण मीडिया की टीम कर्नाटक चुनावों में लगी है, और बहुत जल्द अपने सर्वेक्षणों के आधार पर संभावित नतीजे जारी करेगी।

भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या है, वहां इस प्रकार की संभावनाओं से परिपूर्ण उधम थोड़ा राहत दे सकता है। आज दृष्टिकोण मीडिया के कोर टीम में 42 सदस्य है वहीं अन्य 200 पेशेवर लोग फ्रीलान्स इसके साथ विभिन्न डिजिटल अभियानों से जुड़ अपनी सेवाएं देते है। कंपनी की कॉर्पोरेट आफिस नॉइडे सेक्टर 70 में है।

कंपनी के भविष्य की योजनाओं के बारे में अवगत कराते हुए निदेशक शालिनी ने कहा ” 2019 के लोकसभा के चुनाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हम इसमें निर्णायक भूमिका निभाना चाहते है।”

आज का रिपोर्टर सलाम करता है शालिनी के जज्बे को, सोच को और उन्हें व उनकी टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।

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