भारत की अनगिनत सफल महिलाओं में से पांच, जो पूरे देश के लिए बन गईं प्रेरणा-स्रोत…

भारतीय महिलाओं ने वैश्विक स्तर पर अपनी सफलता से अमिट छाप छोड़ी है और विश्व में देश का नाम ऊंचा किया है। कुछ भारतीय महिलाओं ने अपनी मेहनत के बल पर सफलता का कीर्तिमान बनाया है, की आधी आबादी में उनकी मिसालें दी जाती है।
आइये, नमन करते है कुछ ऐसी ही महिला शख्सियतों को जो आधी आबादी को ही नहीं बल्कि हर किसी को कुछ करने को प्रेरित करती है:-

1. मैरीकॉम

मार्च 1983, काङथेइ, मणिपुर, भारत में मेरी कॉम का जन्म हुआ। लंदन ओलंपिक में कास्य पदक जीतने वाली मैरी कॉम बॉक्सिंग में पांच बार ‍विश्व विजेता का खिताब भी हासिल कर चुकी हैं। 1 अक्टूबर 2014 को मैरी ने इन्चिओन, दक्षिण कोरिया, एशियन खेलों में स्वर्ण जीत कर नया इतिहास रचा। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ बनीं। बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने 2003 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 2006 में उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया। पांच बार की बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन मैरीकॉम तीन बच्चों की माँ बनने के बाद भी जब देश के लिए ओलंपिक्स में भाग लेने का मौका आया, तो पीछे नहीं हटी। माँ बनने के बाद भी मेरी कोम ने हर हाल में हार नहीं मानी। मेरी ने खूब मेहनत और लगन से तैयारी कि और खेल के प्रति समर्पित भावना से वो खेलती रही, न केवल मैरीकॉम खेलीं, पर ऐसा खेलीं कि मैडल लेकर ही वापिस आयी। मणिपुर की एम्. सी. मैरीकॉम ने न केवल सबका दिल जीता, पर साथ ही साथ न जाने कितनी लड़कियों में खेलकूद के प्रति रूचि को बढ़ाया, उन्हें जागरूक किया। महिला मुक्केबाजी में मैरीकॉम के मुक्के को भारत ही नहीं, पूरी दुनिया मान चुकी है। उन्होंने ये साबित किया अन्दर कुछ करने का जज्बा है तो, सफलता हर हाल में आपके कदम चूमती है।

2001 –  
*अमेरिका में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, 48 kg वेट केटेगरी में हिस्सा लिया और यहाँ सिल्वर मैडल जीता।
*इसके बाद सन 2002 में तुर्की में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, 45 kg वेट केटेगरी में मेरी ने गोल्ड मैडल अपने नाम किया।
*इसी साल मेरी ने हंगरी में आयोजित ‘विच कप’ में 45 वेट केटेगरी में भी गोल्ड मैडल जीता।

2003 –
*2003 में भारत में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में 46 kg वेट केटेगरी में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता।
*इसके बाद नॉर्वे में आयोजित ‘वीमेन बॉक्सिंग वर्ल्ड कप’ में एक बार फिर मेरी को गोल्ड मैडल मिला।

2005 –
*2005 में ताइवान में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 46 kg वेट क्लास में मेरी को फिर से गोल्ड मैडल मिला।
*इसी साल रसिया में मेरी ने AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप भी जीती।

2006 –
*2006 में डेनमार्क में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप में मेरी ने जीत हासिल कर, गोल्ड मैडल जीता।

2008 –
*2008 में फिर वापस आई और भारत में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में सिल्वर मैडल जीता।
*इसके साथ ही AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप चाइना में गोल्ड मैडल जीता।

2009 –
*2009 में वियतनाम में आयोजित ‘एशियन इंडोर गेम्स’ में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता।

2010 –
*2010 कजाखस्तान में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता।
*इसी साल मेरी ने एशियन गेम्स में 51 kg वेट क्लास में हिस्सा लेकर ब्रोंज मैडल जीता था।

2011 –
*2011 में चाइना में आयोजित ‘एशियन वीमेन कप’ 48 kg वेट क्लास में गोल्ड मैडल जीता।

2012 –
*2012 में मोंगोलिया में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 51 kg वेट क्लास में गोल्ड मैडल जीता।
*इस साल लन्दन में आयोजित ओलंपिक में मेरी को बहुत सम्मान मिला, यहाँ मेरी को 51 kg वेट क्लास में ब्रोंज मैडल मिला था।

2014 –
*2014 में साउथ कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स में वीमेन फ्लाईवेट में मेरी गोल्ड मैडल जीता।

2.किरण बेदी
इस नाम से कौन वाकिफ नहीं होगा। किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं। किरण बेदी आज भी सामाजिक सुधार क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उनका जन्म 9 जून 1949 में अमृतसर, पंजाब में हुआ। एक आई.पी.एस. रहते हुए उन्होंने बहुत सारे महत्वपूर्ण काम किए। वे संयुक्त राष्ट्र पीसकीपिंग ऑपरेशन्स से भी जुड़ी रहीं और इसके लिए उन्हें मेडल भी दिया गया। उन्हें जेल प्रशासन में महत्वपूर्ण सुधार करने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कैदियों के कल्याण के लिए तिहाड़ जेल में बहुत सारे सुधार किए जिसके लिये उन्हें रमन मेगसेसे पुरस्कार के साथ साथ जवाहर लाल नेहरू फेलोशिप भी मिली थी। जेल सुधारों के लिए उन्हें 2005 में मानद डॉक्ट्‍रेक्ट भी प्रदान की गई थी।

3.प्रियंका चोपड़ा

बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक प्रियंका चोपड़ा आज महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं, उन्होंने न केवल बॉलीवुड, बल्कि हॉलीवुड की फिल्मों में भी काम किया है। प्रियंका ने अपनी बारहवीं क्लास में मिस इंडिया का ख़िताब जीता और उसके बाद सन 2000 में मिस वर्ल्ड बनी, प्रियंका भारत की पाँचवी महिला थीं जिन्होंने “मिस वर्ल्ड” का ख़िताब जीता, साथ ही उसी साल लन्दन के मिल्लेनियम डॉम में “मिस वर्ल्ड ब्यूटी कॉन्टिनेंटल क्वीन ब्यूटी एशिया एंड ओशिनिया” का ख़िताब भी प्रियंका चोपड़ा ने जीता। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का जन्म 18 जुलाई 1982 में झारखण्ड के जमशेदपुर में हुआ। राज कँवर की सफ़ल फ़िल्म “अंदाज़” में उनके दमदार अभिनय को देखते हुए उन्हें “बेस्ट डेब्यू का फ़िल्म फेयर अवार्ड” मिला और साथ ही वे “बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस” के लिए नामित हुईं। इसके बाद इन्हें डेविड धवन की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म “मुझसे शादी करोगी” में वे सलमान खान और अक्षय कुमार के साथ नज़र आयीं। साल 2004 के अंत की तरफ उनकी एक फ़िल्म “ऐतराज़” आई थी। इस फ़िल्म में अभिनय के लिए उन्हें “क्रिटिकल एक्लेम” सम्मान भी प्राप्त हुआ और इसी फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफेयर का “बेस्ट परफॉरमेंस इन नेगेटिव रोल” के लिए अवार्ड मिला। ‘फैशन’ में निभाए गए उनके किरदार के लिए उनकी काफी प्रशंसा हुई। इसके लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म अभिनेत्री के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया गया। फ़िल्म गुंडे, उसके बाद लेडी बॉक्सर मैरी कोम की बायो-पिक में उन्हें मैरीकॉम का रोल मिला। फ़िल्म “बाजीराव-मस्तानी” में उन्हें देखा गया, जिसमे वे काशीबाई की भूमिका में थीं। देश में अपना नाम बना लेने के बाद वे अमेरिका के एक टीवी सीरीज “क्वांटिको” में नज़र आयीं, जिसका एक सीजन अत्यंत सफ़ल रहा है।
प्रियंका चोपड़ा अपने “द प्रियंका चोपड़ा फाउंडेशन ऑफ़ हेल्थ एंड एजुकेशन” इस संस्था के ज़रिये आम लोगों की मदद करती हैं। ये संस्था ग़रीब और महरूम बच्चों को भारत के कई हिस्सों में शिक्षा देतीं है और उनके स्वास्थ का ध्यान रखती हैं। वे अपनी कमाई का 10 प्रतिशत इस संस्था को चलाने के लिए देती हैं। 2006 में उन्होंने unisef के साथ मिलकर बच्चों के अधिकार और ग़रीब लड़कियों की शिक्षा पर काम किया। ग्रीनाथन के तीसरे और चौथे संस्करों में उन्होंने सात गाँवों में लगातार बिजली व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी ली। वे अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और हमेशा अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहने को मानती हैं।

4.लता मंगेश्कर
पार्श्व गायकी की दुनिया में लता से बड़ा शायद ही कोई नाम है, या होगा। लाता जी का जन्म 28 सेप्टेंबर, 1929 को इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। भारत रत्न लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका हैं, जिनकी आवाज़ ने छह दशकों से भी ज़्यादा संगीत की दुनिया को सुरों से नवाज़ा है। भारत की ‘स्‍वर कोकिला’ लता मंगेशकर ने 20 भाषाओं में 30,000 गाने गाये है। सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का ‘गिनीज़ बुक रिकॉर्ड’ उनके नाम पर दर्ज है। ईश्वर के द्वारा दी गई सुरीली आवाज़, जानदार अभिव्यक्ति व बात को बहुत जल्द समझ लेने वाली अविश्वसनीय क्षमता का उदाहरण रहीं हैं। लता जी को भी अपना स्थान बनाने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पडा़। लेकिन धीरे-धीरे अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर आपको काम मिलने लगा।  लता जी की अद्भुत कामयाबी ने लता जी को फ़िल्मी जगत की सबसे मज़बूत महिला बना दिया था। लता दीदी महज एक दिन के लिए स्कूल गई थी। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया। वे फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।
उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी कला बिखेरी है। फिल्मफेयर अवार्ड तो उन्होनें इतने जीतें है कि बाद में उन्होनें खुद ही इस से अपना नाम वापस ले लिए ताकि यह अवार्ड अन्य किसी गायिका को भी मिल सके।
     जब लता ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम में ‘जरा आँख में भर लो पानी’ गीत गाया तो पंडित नेहरू तक की आँखें नम हो गयी थीं। ये गीत सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे।

5.कल्पना चावला

कल्पना चावला 17 मार्च 1962, को करनाल के हरियाणा में जन्मी। वो अन्तरिक्ष में जाने वाली प्रथम “भारतीय” महिला रहीं जिन्होंने अंतरिक्ष पर अपना कदम रखा था। करनाल के ‘टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल” से अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद कल्पना ने चंडीगढ़ स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेकर एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का अध्ययन किया। उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए कल्पना अमेरिका चली गई। अमेरिका में अध्ययन करते हुए 1984 में टेक्सास यूनिवर्सिटी से एअरोस्पेस इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा की उपाधि प्राप्त की। 1988 में कोलोरेडो यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। दिसंबर 1994 में नासा ने उन्हें बुलाया। उनका चुनाव 2962 आवेदनकर्ताओं में से हुआ। इस यान-चालक दल में कल्पना अकेली महिला थी। उनके आलावा चार अमेरिकी, एक जापानी और एक यूक्रेनी यात्री थे। 19 नवंबर 1997 के दिन कल्पना ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए स्पेस शटल कोलंबिया से उड़ान भरी। इसके उड़ान के साथ वे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली पहली भारतीय महिला और दूसरी भारतीय बन गयीं। इससे पहले भारत के राकेश शर्मा ने सन 1984 में अंतरिक्ष की यात्रा की थी। अपने पहली उड़ान में कल्पना चावला ने लगभग 1 करोड़ मील की यात्रा की (जो पृथ्वी के लगभग 252 चक्कर के बराबर था)। उन्होंने कुल 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताये। इसके बाद वे 2003 में कोलंबिया यान से ही दूसरी बार अंतरिक्ष मिशन पर गई। लेकिन 1 फरवरी 2003 को वापसी में उनका यान क्रेश हो गया और उसमे सवार सभी यात्रियों की मौत हो गई। 1 फेब्रुअरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया।

कल्पना चावला निच्छित ही आज के लडकियों की आदर्श है। आज की लडकियों को ये सोचना चाहिये की जब कल्पना चावला एक माध्यम वर्गीय परिवार से होने के बावजूद इतन सब कर सकती है तो हम क्या कुछ नही कर सकते।

भारत देश में महिलाओं ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता का परचम लहराया है और कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं, जो हर किसी के लिए मिसाल हैं और प्रेरणा से भरकर हैं।

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