‘राज’ सुपर 30 का

कृषि प्रधान भारत देश की स्थिति आज के परिप्रेक्ष्य में कृषक प्रधान तो बिल्कुल भी नहीं है। कुछ प्रकृति प्रदत्त समस्यायें तो कुछ मानव निर्मित संरचनाओं से काल कवलित होता जा रहा है कृषक। अन्नदाता के घर में जब दो जून की रोटी की जुगत में प्राण दिए या लिए जाने लगे तो हालात दयनीय है और विचारणीय भी।

कई बार हम ड्राइंग रूम के चश्मे से किसी व्यक्ति या उसके द्वारा किये गए कार्यों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। बजरिये एक ऐसी ही संस्था है ‘सुपर 30‘ जो बिहार के शिक्षाविद व पूर्व डीजीपी अभयानंद और शिक्षकों की टीम पंकज, रवि, अरुण और अन्य सहयोगी कर्मियों द्वारा निरंतर शिक्षा में सकारात्मक योगदान के लिए कार्यरत हैं। ‘उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन‘ व इसके ट्रस्टी ए. डी. सिंह इस संस्थान की गुणवत्ता और कार्यशैली को निर्बाध रूप से बनाये रखने के लिए अनवरत प्रतिबद्ध हैं। संस्था का मूल मंत्र सुविधा वंचित छात्रों को मानसिक, आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके उद्देश्य को नयी दिशा देना है। संस्थान के इस पहल से सुविधावंचित समाज की तस्वीर और छात्रों की तकदीर बदल रही है। ट्रस्ट के संस्थापकों का मानना है कि, आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को मुख्य धारा से जोड़ कर ही समाजिक एकरूपता और विकास की पहल की जा सकती है।

इसी कड़ी में एक नया सितारा उभरा ‘राज‘ । मूलभूत सुविधाओं से वंचित अरवल जिले के कन्हैया-चक गांव का राज कुमार। माँ दसवीं पास और पिता बारहवींसंयुक्त परिवार में पले राजकुमार ने अपने चाचा जो भारतीय सेना में कार्यरत हैं, के यहाँ रहकर अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण की। अरवल जिले में बहने वाली पुनपुन नदी जब अपने उफ़ान पर होती हैं तो वो वहां के लोगों की खेती ही नहीं लीलती बाढ़ में, भर जाती है आँखों में पानी और लील जाती है सारे सपने। एक सपना नीलम देवी और रमेश शर्मा ने भी देखा बेटे को इंजीनियर बनाने का। पता नहीं उनकी नीयत पर नियति ने किस शुभ घडी में दस्तक दी और माँ ने अख़बार में सुपर 30 का विज्ञापन देखा। राज कुमार का चयन सुपर 30 में हो गया, खुशियों पर मालिकाना हक सिर्फ धनाढ्यों का ही नहीं होता।

उम्मीद भरी आंखों में अब चमक थी। पिता रमेश और राज के सपने को साथ मिला सुपर 30 का।

प्रतिभा को कुशलता और अनुभव ने निखारा, आत्मविश्वास बढ़ा तो आईआईटी जैसी विश्व स्तरीय प्रवेश परीक्षा सिर्फ पास नहीं बल्कि रैंक की भी चाह उमड़ी।

आईआईटी में राज कुमार का चयन प्रथम प्रयास में ही हो गया। फिलहाल राज आईआईटी मंडी, हिमाचल में सिविल इनजिनीयरिंग की पढ़ाई कर रहा है। आज वो अपने उस प्रकृतिक आपदा से प्रभावित इलाके का जीवंत उदाहरण है, उसकी मिसालें दी जाने लगीं है। कल तक जो वर्तमान से जूझ रहा था, आज वो कितनों के भविष्य संवारने का सशक्त उदाहरण बन चुका है।

बातचीत में अति उत्साह के साथ अपनी सुपर 30 की यात्रा का ज़िक्र करता है। कहता है, स्वस्थ प्रतियोगी माहौल का परिणाम है कि, विषम अवस्थाएं भी मुझे वंचित न कर पाईं मंज़िल तक आने से।

अभी तो सारा जहां नापना बाकी है;

जब हौसला बना लिया

ऊँची उड़ान का..

फिर देखना फिजूल है

कद आसमान का…”

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram


SHARE
Previous articleरेस 3 का ट्रेलर जारी- जबर्दस्त एक्शन में दिख रहें हैं सलमान खान
Next articleमुंबई इंडियंस बनाम किंग्स एलेवेन पंजाब आज , जो हारा सो बाहर
Rani Kashyap
माँ पहली गुरु और उनका समस्त जीवन ही पाठशाला। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक। पढ़ना, पढ़ाना, गीत-संगीत सभी या यूं कहे की वीणावादिनी से हर बार स्वर देने की इच्छा आप तक लायी है। परिवार और मित्रों का अप्रतिम सहयोग और आशीर्वाद भी मेरी शिक्षा का अभिन्न पाठ। इन सभी से ऊपर अपने मौन से संवाद जहाँ अक्षर बनने की कोशिश में है शब्द और शब्द, वाक्य। परम्परागत शिक्षा को एक बार चुनौती दी मौन ने कि, साहित्य में "डूबना मत की डूबते तो वो हैं की जिन्हे गहराई का पता नहीं होता" कई वर्ष मुखर होने के बाद भी दो पल का मौन है अभिन्न गुरु और प्रेरक जो वंदनीय है।