क्रिकेट वर्ल्ड कप में अगर इंडिया फाइनल में जगह बना लेता तो शायद इस बच्चे को आज कोई नही जानता

नाम – आकाश आनंद

पिता जी का नाम – श्री भूषण प्रसाद

माता का नाम – निवा सुप्रिया

ग्राम – सोनमई, गौरीचक बेलदारी चक के निकट

थाना – धनरुआ

पिन कोड – ८०४४५१

ये किसी पटकथा के किरदार का परिचय नहीं और न ही किसी पेशी में आया कोई व्यक्ति।

आकाश आनंद अब किसी परिचय का मोहताज़ नहीं। उसकी पेशी तो होती है, अपने इलाके में मगर, औरों के लिए मिसाल बनकर। पुनपुन नदी के किनारे स्थित सत्यम इंटरनेशनल स्कूल के, सीबीएसई बोर्ड से १० वीं की परीक्षा शत प्रतिशत अंकों से पास की।

आकाश अपनी बातचीत के दौरान कहता है। मुझे आगे की पढ़ाई इंजीनियरिंग को ही लेकर जारी करनी थी। मेरे घर में समाचार पत्र लेना पैसे की बर्बादी माना जाता रहा है। दुनिया से जुड़े रहने और जानकारी पाने का एकमात्र जरिया टी.वी. ही था। कोचिंग संस्थानों की जानकारी अमूमन टेलीविज़न पर नहीं आती और जो आती है वो या तो देश के बड़े शहरों में होती है या बहुत अधिक फी वाली होती है। स्थानीय विज्ञापनों के लिए आज भी समाचार पत्र बेहद सटीक माध्यम है। उन्हीं दिनों आकाश के मामा ने ‘अभयानंद सुपर ३०‘ में निकले प्रवेश परीक्षा की जानकारी दी जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली बच्चों को आईआईटी जैसे उच्च परीक्षा की तैयारी निःशुल्क कराई जाती है। मैंने वो फॉर्म भर दिया।

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है।”

साल २०१५ में जिस समय सुपर ३० की प्रवेश परीक्षा का तारीख निर्धरित हुआ, उस समय क्रिकेट वर्ल्ड कप भी होने वाला था। आकाश ने अपने पिताजी से कहा अगर इंडिया फाइनल में अपनी जगह बना लेगा तब तो मैं ये सुपर ३० की परीक्षा नहीं दूंगा। मगर क्रिकेट प्रेमी आकाश की ये इच्छा न पूरी हुई। उसने सुपर ३० की प्रवेश परीक्षा दी और उसका चयन अगले दो साल के लिए ऐसी जगह हो गया जहाँ से उसे मानसिक खुराक मिलनी शुरू हो गई एक बेहतरीन भविष्य बनाने की जिसके लिए वो और उसका परिवार चिंतित था। सुपर ३० में अपनी जगह पा जाने पर आकाश अति उत्साहित था। उसने आईआईटी के लिए पहले पायदान पर कदम रख दिया था। परिवार में हर किसी की खुशियों की कोई सीमा नहीं थी।

पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल स्थित कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस से २०१७ में १२वीं की परीक्षा आकाश ने ७७ प्रतिशत मार्क्स के साथ पास की। २०१७ में अपने प्रथम प्रयास में आकाश का चयन आईआईटी में हो गया। अभी आकाश इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी की दिल्ली शाखा से कर रहा है।

उर्मिलासिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन‘ और इसके ट्रस्टी ए.डी.सिंह द्वारा वित्त प्रदत्त्त संस्था सुपर ३० निम्न आय वर्ग के प्रतिभशाली छात्रों के लिए वरदान है। पूर्व डीजीपी अभयानंद, पंकज, रवि और अरुण सर एवं अन्य सहयोगी कर्मियों द्वारा इस संस्था को निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। यहाँ का शैक्षणिक माहौल competition with collaboration के तर्ज़ पर चलता है।

आकाश आनंद बड़ी शिद्दत से ये बात स्वीकार करते हुए कहता है कि हम मानसिक रूप से संस्था में एक बेहतरीन छात्र ही नहीं अपितु बेहतरीन इंसान भी बन कर बाहर निकलते हैं। स्वयं, समाज और देश का उत्थान ही हमारा मनोभाव है

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Rani Kashyap
माँ पहली गुरु और उनका समस्त जीवन ही पाठशाला। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक। पढ़ना, पढ़ाना, गीत-संगीत सभी या यूं कहे की वीणावादिनी से हर बार स्वर देने की इच्छा आप तक लायी है। परिवार और मित्रों का अप्रतिम सहयोग और आशीर्वाद भी मेरी शिक्षा का अभिन्न पाठ। इन सभी से ऊपर अपने मौन से संवाद जहाँ अक्षर बनने की कोशिश में है शब्द और शब्द, वाक्य। परम्परागत शिक्षा को एक बार चुनौती दी मौन ने कि, साहित्य में "डूबना मत की डूबते तो वो हैं की जिन्हे गहराई का पता नहीं होता" कई वर्ष मुखर होने के बाद भी दो पल का मौन है अभिन्न गुरु और प्रेरक जो वंदनीय है।