चाँद मुबारक

रमादान की आख़िरी शाम मुबारक
शाम की नमाज़ पर मचल के उतरा

इतराता हुआ चाँद मुबारक

नज़ाकत लिए हाथों में खनखनाती चूड़ियां मुबारक

वो झुमके, वो बालियां, वो शेरवानी और मोजड़ियां

वो दुपट्टे पर जड़े, चाँद संग उतरे सितारे मुबारक

उलझी सेवईयों की सुलझी मिठास मुबारक

गले जो लगे तो जिग़र की धड़कने मुबारक

गरम सूरज की तासीर पर चमकता

पर ख़ुद को संभाले ‘नरम चाँद

बस यही नरमी वाला चाँद, खूबसूरत चाँद मुबारक

कोई गुनगुनाएगा यूं भी

जमाने की ईदों और चाँदों से हमें क्या मतलब,

मुझे जो मेरा चाँद दिख जाए, तो मेरी ईद हो जाए.

उधर से चाँद तुम देखो, इधर से चाँद मैं देखूँ,

निगाहें यूँ टकराएँ कि दो दिलों की ईद हो जाए.

इससे अतर दुआयें मेरी ये की,

जिनके भी जहन में चाँद महफूज है,

उनको चाँद का ये खूबसूरत पर्व मुबारक !

ईद मुबारक

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram


SHARE
Previous articleफीफा कप 2018: मैच तीन में ईरान को मिली ऐतिहासिक जीत
Next articleब्रिटेन के अदालत ने भगोड़े मल्ल्या को आदेश दिया, कहां 2,00,000 पौंड का भुगतान करे
Rani Kashyap
माँ पहली गुरु और उनका समस्त जीवन ही पाठशाला। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक। पढ़ना, पढ़ाना, गीत-संगीत सभी या यूं कहे की वीणावादिनी से हर बार स्वर देने की इच्छा आप तक लायी है। परिवार और मित्रों का अप्रतिम सहयोग और आशीर्वाद भी मेरी शिक्षा का अभिन्न पाठ। इन सभी से ऊपर अपने मौन से संवाद जहाँ अक्षर बनने की कोशिश में है शब्द और शब्द, वाक्य। परम्परागत शिक्षा को एक बार चुनौती दी मौन ने कि, साहित्य में "डूबना मत की डूबते तो वो हैं की जिन्हे गहराई का पता नहीं होता" कई वर्ष मुखर होने के बाद भी दो पल का मौन है अभिन्न गुरु और प्रेरक जो वंदनीय है।