शिव शुद्ध और कल्याण बस तुम से तुम तक।

कोई शर्वाय जपा सर्व बाधा मुक्ति हेतु तो कोई जोड़े बैठा है नाता कपाली भूतनाथ से तंत्र साधना में । किसी में ध्यान बन उतरे योगिराज तो पशुपति बन छाए पशुपालकों के हिए पर। धरती से प्रीत जोड़ी तो चंद्रमौलि की रीत निभाने आ गए और तनिक सांसारिक सुखों की कामना की तो शंकर आन मिले।

कभी ढंक दिए गए भोले कनेर, धतूरे, बिल्व पत्र और आंकड़े के फूलों से। सबको मिले महादेव अपने अपने।

कुछ अतरंगी और भी उतरे अर्धनारीश्वर की अधमुंदी आंखों में
गंगा में गले
कर्पूर बन जले
स्वयं ही बिल्व बने
और स्वयं ही रोली
प्रीत की बूँद बन बरसे
सरगम पर उतरे नटराज के
मूंदे नयन बैठ गए हठ बनारसी लिए , घट पर भी और घाट पर भी।
मन मलंग बस रमता जोगी बहता पानी।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram


SHARE
Previous article2019 के लिए क्या होगी अमित शाह की ‘चाणक्य’ नीति! कौन सा दल है एनडीए की रीढ़ की हड्डी?
Next articleराजनीति से किस प्रकार संविधान को खतरा है?
Rani Kashyap
माँ पहली गुरु और उनका समस्त जीवन ही पाठशाला। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक। पढ़ना, पढ़ाना, गीत-संगीत सभी या यूं कहे की वीणावादिनी से हर बार स्वर देने की इच्छा आप तक लायी है। परिवार और मित्रों का अप्रतिम सहयोग और आशीर्वाद भी मेरी शिक्षा का अभिन्न पाठ। इन सभी से ऊपर अपने मौन से संवाद जहाँ अक्षर बनने की कोशिश में है शब्द और शब्द, वाक्य। परम्परागत शिक्षा को एक बार चुनौती दी मौन ने कि, साहित्य में "डूबना मत की डूबते तो वो हैं की जिन्हे गहराई का पता नहीं होता" कई वर्ष मुखर होने के बाद भी दो पल का मौन है अभिन्न गुरु और प्रेरक जो वंदनीय है।