झोपड़पट्टी में पढ़ने वाले युवक ने, कैसे तय किया IIT तक का सफर

बिहार राज्य की पहुंच आज देश से लेकर विदेश तक है चाहे वह कला का क्षेत्र हो, प्रतिभा का क्षेत्र हो या खेल कूद का। विकसित होने की राह पर तेजी से आगे बढ़ता हुआ बिहार आज तरक्की की बुलंदियों की ओर अग्रसर है। शिक्षा के क्षेत्र में बात की जाए तो बिहार शिक्षा के क्षेत्र में सर्वप्रथम प्रमुख केंद्र में गिना जाता था और आज भी यहां कई होनहार ऐसे पड़े हैं जो देश के प्रमुख परीक्षा में अपना कब्जा जमाने में कामयाब रहते हैं। बिहार के इन्हीं होनहारों की लिस्ट में एक नाम सर्वेश कुमार का भी है तो चलिए जानते हैं सर्वेश कुमार के बारे में…….

कौन हैं सर्वेश कुमार? 

सर्वेश कुमार बिहार राज्य की राजधानी व पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव रेवां के निवासी हैं। जो इस समय IIT की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे सर्वेश ने जो मेहनत की है और जो परिस्थितियां सर्वेश के सामने दीवार बनकर खड़ी थी और उसडका रास्ता रोक रही थी कि वह आगे नहीं बढ़ सकता था लेकिन सर्विस ने उम्मीद जिंदा बचा कर रखे थे और इसी उम्मीद के बलबूते सर्वेश ने आज बुलंदियों के आसमान को छू रखा है। संयुक्त परिवार में पले-बढ़े सर्वेश कुमार का परिवार काफी बड़ा है। सर्वेश कुमार की दो बहने हैं और अगर संयुक्त परिवार को मिलाया जाए तो 7 बच्चों और 9 अंग्रेजों का एक बड़ा परिवार है। सर्वेश के पिताजी ने गणित में स्नाकोत्तर किया है लेकिन रोजगार के अभाव में वे नजदीक शहर में जाकर गाड़ी चलाने का काम करने लगे थे और वहां जब उन्हें गाड़ी चलाने के धंधे में लगातार नुकसान होने लगा तो पटना आकर सर्वेश के पिताजी ने मुंशी का काम करना शुरू कर दिया। सर्वेश का बचपन झोपड़पट्टी में बने एक स्कूल में बीता लेकिन झोपड़पट्टी में पढ़ने वाला सर्वेश किसी दिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई करेगा, यह बात उस स्कूल के प्राचार्य ने कभी नहीं सोची होगी जो प्रत्येक दिन स्कूल की छुट्टी होने पर सभी बच्चों से 1 से 40 तक का पहाड़ा (टेबल) सुनते थे और जिनको पहाड़ा नहीं याद रहता था या जिनके हिस्से में 30 से 40 तक का पहाड़ा सुनाने का मौका आता था उनके चेहरे की शिकन या बता देती कि यह मार खाकर जाने वाले हैं। स्कूली पढ़ाई खत्म होने वाली थी फिर एक शाम सर्वेश अपने पिताजी के पैर दबा रहे थे तो उनके पिता जी ने कहा कि ‘अगर इस बार इस स्कूल में प्रथम स्थान लाओगे तो पटना में एडमिशन करवा दूंगा।’ लेकिन उन दिनों शहर जाकर पढ़ाई करना और फीस भरना काफी महंगा था और गांव में उस वक्त केवल कक्षा 7 तक की शिक्षा व्यवस्था थी। पटना तो जाना ही था आगे की पढ़ाई के लिए लेकिन बहुत भागदौड़ के बाद भी सर्वेश को कोई रास्ता न सूझा तब एक नजदीकी शिक्षक ने सर्वेश के पिताजी को सलाह दी कि बिहार बोर्ड में ही एडमिशन करवा दीजिए और किसी अच्छी कोचिंग में पढ़ कर सर्वेश दसवीं पास कर ले फिर आगे का रास्ता खुद ब खुद खुल जाएगा। सर्वेश ने दसवीं की पढ़ाई प्रेमानंद प्रभाकर हाई स्कूल से पूरी की और यहां दसवीं में उन्हें अजीत सर के द्वारा गणित विषय को समझने में बहुत मदद मिली। सर्वेश ने 12वीं की पढ़ाई नारदीगंज कॉलेज बिहार से पूरी की। बाद में सर्वेश ने बहुत सारी कोचिंग में एग्जाम दिया जहां उन्हें कुछ ना कुछ स्कॉलरशिप के साथ एडमिशन मिलना तय हो गया।

अभ्यानंद सुपर-30 की ओर सफर – 

सर्वेश को इसी वक्त उनके चचेरे भाई के जरिए अभयानंद सुपर-30 के एग्जाम के बारे में पता चला लेकिन सर्वेश ने जानते हुए भी इस बात को नजरअंदाज करना ठीक समझा क्योंकि सर्वेश को यह पता था कि वहां केवल नॉन जनरल कैंडिडेट का ही चयन होता है तो हम क्या करेंगे एग्जाम देकर? लेकिन सर्वेश के चचेरे भाई का जब अभयानंद सुपर-30 में सलेक्शन हो गया तब सर्वेश ने सोचा कि जब मेरे भाई का सिलेक्शन ऐसी कोचिंग में हो गया जहां से लोग सीधे आईआईटी में प्रवेश पाते हैं तो मेरा एडमिशन क्यों नहीं हो सकता ?

“मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं , 

हुस्न के परदे निगाहों से हटाती हैं ,

हौसला मत हारना गिरकर ओ मुसाफिर ,

ठोकरें इन्सान को चलाना सिखाती हैं |”

आनन फानन में सर्वेश अपने पिताजी के साथ अभ्यानंद सुपर-30 के संचालक व पूर्व डीजीपी अभ्यानंद सर से मिलने उनके घर पहुंचे लेकिन अभ्यानंद सर को देखकर सर्वेश हैरान हो गए कि एक साधारण से पायजामे और वेस्ट में प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठकर वह छात्रों को कांसेप्ट समझा रहे थे। सर्वेश को यकीन नहीं हो रहा था कि यह कभी डीजीपी भी थे जब सर्वेश ने अभ्यानंद सर से बात की और कहा कि, “सर मैं सुपर-30 के टेस्ट में उपस्थित नहीं हो पाया तो अगर आप मेरा छोटा सा इंटरव्यू ले लेते तो…..?” अभयानंद सर गुस्से में आकर बोले कि ‘आप लोग यूं ही आ जाते हो, सर हमको भी! सर हमको भी!’

कुछ समय चुप रहने के बाद अभ्यानंद सर ने पंकज सर का नंबर दिया और कहा कि, “बात कीजिए इनसे…. शायद अभी एक और टेस्ट होना बाकी है।” फिर सर्वेश ने पंकज सर से बात की तब पंकज सर ने बताया कि, “एक एग्जाम होना है जो कि भागलपुर में होगा।”

कुछ दिनों बाद भागलपुर जाकर सर्वेश ने सुपर थर्टी में पढ़ने के लिए परीक्षा दी और सर्वेश का चयन भी अभ्यानंद सुपर-30 में हो गया। सर्वेश का IIT में जाने का सपना यहां साकार होने के लिए दिख रहा था क्योंकि जिस हिसाब से अभ्यानंद सर के मार्गदर्शन में विषयों को पढ़ाया जाता था वह बेहद शानदार था। सुपर-30 में पढ़ने वाले एक से बढ़कर एक धुरंधरों से मुलाकात करके सर्वेश ने यह जाना कि कोई किसी विषय में महारत हासिल किया हुआ है तो कोई किसी अन्य विषय में महारथी है। सर्वेश ने आज का रिपोर्टर का इंटरव्यू देने के दौरान बताया कि अभ्यानंद सर का फिजिक्स पढ़ाने का तरीका बहुत ही शानदार है और पढ़ाई के दौरान वह बताते थे कि कैसे उन्होंने अपने जीवन की कई समस्याओं को फिजिक्स का प्रयोग करके सुलझाया था। सर्वेश ने तैयारी के दौरान ही कई उपलब्धियां प्राप्त की जैसे KVPY में दो बार क्वालीफाई किया तथा JEE Mains, JEE Advance, BITSAT, VIT में भी सफलता प्राप्त करने से नहीं चूके।

सफलता की सीढ़ी  – 

वक्त बीतता गया और करीब 2 सालों की कड़ी मेहनत लगन और अभयानंद सुपर-30 के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हुए सर्वेश ने आईआईटी की परीक्षा में भी अपना दमखम साबित कर दिया सर्वेश आज बिट्स पिलानी कॉलेज गोवा में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग स्ट्रीम में पढ़ाई कर रहे हैं। सर्वेश ने बताया कि आप अभ्यानंद सर अक्सर पढ़ाई के दौरान कहा करते थे कि, “समाज से अगर कुछ पाया है तो उसे लौटाने की पुरजोर कोशिश होनी चाहिए।” सर्वेश का कहना है कि, “मैंने अभयानंद सर के द्वारा सुझाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है और समाज को लौटाने के लिए मैं प्रत्येक क्षण प्रयत्न में लगा हूं और लगा रहूंगा।”

“वो  पथ  क्या  पथिक  कुशलता  क्या ,जिस  पथ  में  बिखरें  शूल  न  हों 

नाविक  की  धैर्य  कुशलता  क्या , जब  धाराएँ प्रतिकूल  न  हों ।”

आज का रिपोर्टर की तरफ से अभ्यानंद सुपर-30 को धन्यवाद कि उन्होंने समाज में ऐसा चिरागों को सूर्य बनाने की कोशिश जारी रखी है और उनकी कोशिश ऐसे ही जारी रहे ताकि बिहार जैसे राज्यों को और भी आगे ले जाया जा सके। अभ्यानंद सुपर थर्टी कोचिंग के द्वारा छात्रों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान की जाती है साथ में उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त में और बेहतरीन सुविधाओं के साथ की जाती है। सुपर थर्टी कोचिंग के छात्रों के लिए मुफ्त में शिक्षा एवं खाने-पीने के रहने की व्यवस्था के लिए उर्मिला सिंह प्रताप धारी सिन्हा फाउंडेशन  की तरफ से  सहायता प्राप्त होती है  इस फाउंडेशन के  ट्रस्टी एडी सिंह हैं। आज का रिपोर्टर सर्वेश कुमार के उज्जवल भविष्य की कामना करता है कि वह भविष्य में और भी ऊंचाइयों पर जाएं और अपने गुरूजनों, मां बाप, और बिहार का नाम रौशन करें।

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