क्या गूगल पत्रकारों को तथ्य जांचने का प्रशिक्षण देकर “फेक न्यूज़” पर लगाम लगा पाएगा?

“फेक न्यूज़” आज की पत्रकारिता व संचार जगत के लिए सबसे चुनौती है जिससे लड़ने का दावा दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां कर चुकी है| इसी कड़ी में पिछले साल गूगल ने अपने फेक न्यूज़ विरोधी अभियान की घोषणा की थी और अब उसी कार्यक्रम के तहत वह भारत के 8,000 पत्रकारों को तथ्य जांचने का प्रशिक्षण देगा जिससे फेक न्यूज़ को प्रकाशित करने से पहली ही रोका जा सके और लोगों तक असली ख़बर सम्प्रेषित हो सके|

गूगल इंडिया ने मंगलवार को कहा कि वह अगले एक साल में भारत में 8,000 पत्रकारों को प्रशिक्षित करेगा जिसमें अंग्रेजी सहित छह भारतीय भाषाओं के पत्रकार शामिल होंगे। इसके तहत गूगल न्यूज़ इनिशिएटिव इंडिया ट्रेनिंग नेटवर्क देश भर के शहरों से 200 पत्रकारों का चयन करेगा, जो पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में सत्यापन और प्रशिक्षण के अपने कौशल में सुधार करेंगे। यह शिविर अंग्रेजी सहित छह अन्य भारतीय भाषाओं के लिए आयोजित किया जाएगा।

सर्टिफाइड ट्रेनर्स के इस शिविर के ज़रिये पत्रकारों के लिए दो दिन ,एक दिन और आधे दिन की वर्कशॉप यानी कार्यशाला आयोजित की जाएँगी| गूगल इंडिया ने एक बयान में कहा कि भारत के शहरों में अंग्रेजी ,हिंदी, तमिल, तेलुगू, बंगाली, मराठी और कन्नड़ में प्रशिक्षण दिया जायेगा|

प्रशिक्षण का उद्देश्य पत्रकारों को तथ्यों की जांच करने और ऑनलाइन सत्यापन में सक्षम   करना है, जिसके लिए फर्स्ट ड्राफ्ट, स्टोरीफुल, अल्टेन्यूज़, बूमलिव, फैक्टशेकर डॉट इन और डाटलिड्स के विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए पाठ्यक्रम का उपयोग किया जाएगा।

बेशक गूगल द्वारा यह पहल काबिले ए तारीफ है लेकिन मुद्दे की बात है कि यह इससे विश्व के संकटो में से एक बन चुके फेक न्यूज़ पर लगाम लग पाएगी ? क्योंकि इंटरनेट के भवतर सागर है जिसमें जानकारी की गहराइयाँ असीम है , आप एक पक्ष रख सकते है परन्तु दुसरे ही पल दूसरा पक्ष अपनी बात को रखने आपके सामने प्रकट हो जायेगा और इतनी विविधता में फेक या रियल न्यूज़ का चयन बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि एक आदमी आदमी के पास पत्रकार वाला न्यूज़ सेंस नहीं हो सकता जो जांच-परख करके ही साड़ी न्यूज़ पेश करता है|

फेक न्यूज़ का ख़तरा बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि सस्ते डिवाइस ,तेज़ इंटरनेट स्पीड और अनगिनत वेबसाइट ,प्लेटफॉर्म्स आदि से इंटरनेट यानी नई मीडिया का दायरा एक अमीर धन्नासेठ से लेकर एक साधारण से ग्रामीणवासी तक जा पहुंचा है इसलिए पत्रकारों का यह धर्म है कि वह तटस्थता के मार्ग पर अग्रसर होकर असली ख़बर नई बताएं ही और फेक न्यूज़ का हर कदम पर्दापाश करें| 

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