वोडाफोन, आइडिया 5000 से अधिक कर्मचारियों को छोड़ सकता है

अगले महीने वोडाफोन और आइडिया का विलय होने जा रहा है। इन दिनों वोडाफोन और आइडिया दोनों कंपनी काफी घाटे में चल रही हैं। दोनों ही कंपनियों पर कुल मिलाकर 1,20,00 करोड़ रुपये का कर्ज है।
        जिओ लहर से टेलीकॉम इंडस्ट्री में बहुत कुछ बदला है, और आगे भी बदलाव होंगे। एयरसेल का दिवालिया होना, एयरटेल और यूनिनॉर और वोडाफोन और आईडिया का विलय भी उन्ही बदलावों में हैं। इस से पूर्व इन बदलावों के कारण काफी संख्या में लोगों ने नौकरियां गवाई हैं। ऐसे में इन दोनों कंपनियाें में होने वाले छटनी से इस सेक्टर में नर्इ नौकरियों के अवसर पैदा करने के लिए दबाव बढ़ सकता है। इस इंडस्ट्री के कर्इ जानकारों का मानना है, कि मर्ज के बाद बनने वाली नर्इ कंपनी तेजी से कर्इ अहम बदलाव कर सकती है, इसके साथ ही नेटवर्क बढ़ाने, आैर प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर प्राइस पर भी फोकस करना चाहेंगी। ऐसे में वोडाफोन और आइडिया की छंटनी से और दबाव बढ़ेगा. आइडिया में अभी 11,000 और वोडाफोन इंडिया में 10,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। इसमें खराब परफॉर्मेंस वाले कर्मचारियों को सबसे पहले निकाला जाएगा। इसके बाद दोनों कंपनियों पर एक ही पद पर काम कर रहे लोगों पर छंटनी की तलवार लटकेगी। पिछले महीने वोडाफोन और आइडिया ने बताया था, कि मर्ज के बाद बनने वाली नई कंपनी के सीईओ बालेश शर्मा होंगे। मर्ज के बाद बनने वाली कंपनी को पहले कर्मचारियों की संख्या घटानी पड़ेगी।

विलय के बाद बनी नई कंपनी का टेलीकॉम इंडस्ट्री में 42 प्रतिशत हिस्सा होगा। वह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी होगी। दोनों कंपनियों के मर्ज के बाद आइडिया और वोडाफोन एक ही नेटवर्क का उपयोग करेंगी। इससे दोनों कंपनियों के ग्राहकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इस विलय के बाद दोनों कंपनियों के ग्राहक 38 करोड़ हो जाएंगे। मर्ज के बाद कंपनी के पास सबसे ज्यादा ग्राहक हो जाएंगे। ऐसे में कंपनी जियो के सामने मजबूती से खड़ी रहेगी, क्योंकि वोडाफोन-आइडिया का नेटवर्क जियो से कहीं ज्यादा हैं।

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