सोशल मीडिया सब पर भारी

“सोशल मीडिया” बस नाम ही काफी हैं। गाँव से लेकर मेट्रोपोलिटन शहरों तक हर जगह, हर एक इंसान से लेकर, हर तरफ़ इसका चाल-चलन हैं। सोशल मीडिया की पहुंच अब बहुत बड़ी है। इस से राजकारण का क्षेत्र भी बहुत प्रभावित हुआ हैं। आज सोशल मीडिया लोगों तक हर एक बात पहुचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं, जहां तक इंटरनेट की पहुंच, चाहे कितनी भी सीमित हो, लेकिन इस माध्यम से मतदाताओं को न केवल पंतप्रधान नरेन्द्र मोदी जी के बारे में जानकारी प्राप्त हुई, बल्कि आम तौर पर चुनाव के बारे में सभी प्रकार की जानकारी घर बैठे उन्हें प्राप्त हुई।

हम जानते हैं,कि आज देश में अधिकांश मतदाता 18-45 समूह के बीच हैं और जिस हद तक वे अपने सामाजिक प्रोफाइल पर सक्रिय हैं, पिछले कुछ वर्षों में भारी वृद्धि देखी गई है। युवाओं को सोशल मीडिया साइट्स से राजनीति के बारे में समाचार प्राप्त होते हैं। जिस से यह समझाना मुश्किल नहीं है, कि वे राजनीतिक उम्मीदवारों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए सोशल मीडिया का किस तरह से उपयोग करते हैं। जाहिर है, औसत मतदाता अपने दोस्तों और परिवार को राजनीतिक मामलों पर प्रभावित करने के लिए ऑनलाइन सामाजिक नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं। फेसबुक का विकल्प भी है, कि आप लोगों को यह बताने दें, कि आपने मतदान किया-और आप यह भी चुन सकते हैं, कि आपने किसे मतदान किया। जिस व्यक्ति ने देखा, कि उनके दोस्तों ने मतदान किया और किसे किया, वास्तव में इस बात की अधिक संभावना रहती हैं, कि वे भी उन्हें ही वोट देंगे। इसी बात को मध्य नज़र रखते हुए, भारत देश के सभी राजनीतिक दलों ने अपना ध्यान सोशल मीडिया पर केंद्रित किया।

राजनेता ये जान गये,कि भारत बदल रहा है और भारतीय राजनीतिक प्रवचन बदल रहा है। उन्हें भी जल्दी ही बदलना होगा और इसका उत्तम उदाहरण हैं, २०१४ के लोकसभा चुनाव में हुई भाजपा की जीत। इस से ये पता चला, की भारत में चुनावों पर सोशल मीडिया का प्रभाव कितना जबरदस्त हैं। चुनावों से पहले इस बात को लेकर काफी बहस हुई थी, की मोदी लहर वास्तव में हैं या नहीं, लेकिन ‘मोदी लहर’ वास्तव में ऑनलाइन थी और इस बात की पुष्टि, हमे फेसबुक और ट्विटर पर भाजपा और मोदी जी के नंबरों को देखने के बाद हो जाती हैं और इसका नतीजा ये पैदा हुआ, की भाजपा ने चुनावों में व्यापक वृद्धि की। पहली बार मतदाताओं पर प्रभाव महसूस किया गया, जो एक सकारात्मक संदेश सुनना चाहते थे। हर कोई राजनीतिक दलों, राजनेताओं और मतदाताओं के द्वारा किये जाने वाले भाष्य को या फिर संदेश और टिवट्स को अपने मोबाइल उपकरणों पर, अपने टीवी स्क्रीन पर या उनकी दैनिक समाचार रिपोर्टों में २४×७ देख रहा था, पढ़ रहा था। सोशल मीडिया के प्रभाव का एक और उदाहरण हैं, २०१७ के अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव। यहाँ पर सोशल मीडिया पर मतदाताओं को सामाजिक चैनलों पर बहस, पोस्टिंग और खुले तौर पर विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन करते हुए देखा गया है।

भारत में हर साल, औसत ब्रॉडबैंड और मोबाइल कनेक्शन की गति बढ़ जाती है, जिससे हमारे स्मार्टफोन और भी अधिक सक्षम होते हैं। यह विशेष रूप से एक संदेश माध्यम के लिए उपयोगी है। बड़े विपणन ब्रांड मोबाइल मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करना शुरू कर रहे हैं जैसे कि, फेसबुक मैसेंजर और व्हाट्सएप, जिस से लोगों के साथ एक-एक इंटरैक्शन जेनरेट किया जा सके। इस से लोगों की जानकारी, पसंद-नापसंद, उनकी राय समझने में आसानी होती हैं और इसका फायदा चुनावों में राजनीतिक दलों को होता हैं। जिन प्रौद्योगिकी कंपनियों का हम उपयोग करते हैं, वे डेटा ट्रैकिंग और विश्लेषण के कुछ रहस्यों के साथ भविष्य के चुनावों में बढ़ती भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। विश्लेषिकी, संभावित समर्थकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है, उन्हें खोजने के लिए,उनके दिमाग में क्या है, कौन से अभियान संदेश वे पसंद करते हैं या नहीं पसंद करते हैं, और कितना वे वोट करेंगे, ये बताता हैं। ये हमारी आदतों से और ऑफ़लाइन मिली हुई जानकारी से अधिक डेटा एकत्र करता है और राजनीतिक दलों के अभियान को हर एक मतदाताओं तक हर माध्यम से पहुचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। सोशल मीडिया के सबसे महत्त्वपूर्ण प्रभावों में से एक प्रभावित करने वाली बात ये हैं, की ये उन लोगों के लिए एक मंच प्रदान करता है,जिनके पास पहले अपनी बातों को बताने के लिये और अपने जैसे ही कई और लोगों तक पहुचने के लिये कोई मंच उपलब्ध नहीं था। ये बात उनके लिए बहुत बड़ी होती है, की “एक बहुत बड़े समूह से संबंध रखना, जो नए सोशल मीडिया संदर्भों में उत्पन्न हो रहा है, जो पारंपरिक रूप से अधिक अत्याधुनिक विचारों को देखता है।

आज हम सोशल मीडिया का विस्तार देख रहे हैं। सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर उम्र का इंसान कर रहा हैं। लोग राजनैतिक दलों के मुद्दों और वादों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं और ट्विटर और फेसबुक जैसी वेबसाइटों के जरिए वाद-विवाद कर सकते हैं। लोग राजनीतिज्ञों की सराहना करते हैं जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और लोगों के साथ संपर्क बनाये रखते हैं।

‎इसका उपयोग सरकार अपनी उपलब्धियों को प्रसारित करने के लिये कर रहा हैं। सुरेश प्रभु और  सुषमा स्वराज दोनों मंत्री हैं, जिनके विभाग ने ट्विटर पर कई बार लोगों को मदद की है। जबकि २०१४ के चुनावों में सोशल मीडिया का उपयोग करने की एक झलक देखी गई, यह २०१९ के चुनाव होगा जहां इसकी ताकत पूरी तरह से उपयोग की जाएगी। अब तक यह शहरी शिक्षित युवाओं तक ही सीमित था लेकिन अब यह अधिक समावेशी होगा। इसलिए आनेवाले चुनावों में सोशल मीडिया की, भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहेगी।

 

 

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