गहरे दोस्त कनाडा पीएम जस्टिन त्रुदो पर क्यों बरसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ?

कनाडा के क्यूबेक शहर में 8 -9 जून तक चले विश्व के साथ सर्वोत्तम शक्तिशाली देशों के समूह जी-7 सम्मलेन का समापन बड़े विवाद और वैश्विक व्यापर जंग के फिर से शुरू हो जाने के डर के बीच हुआ| इस सम्मलेन में एक ऐसी वैश्विक राजनैतिक और कूटनैतिक घटना घाटी जिसने पूरी दुनिया को ज़ोर का झटका धीरे से दिया है|

दुनिया के सबसे शांतिमय बॉर्डर का गौरव रखने वाले कनाडा -अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षो में तल्खी की तलवारे खिंच गई है| डोनाल्ड ट्रम्प अपने चिर-परिचित अंदाज़ में आकर कनाडा के पीएम जस्टिन त्रुदो को बेईमान और कमज़ोर करार कर बैठे|

जी-7 में दरार के संकेत तब सामने आए जब साझा बयान को राष्ट्राध्यक्षों द्वारा मंजूर कुया गया था लेकिन इसके कुछ देर बाद ही ट्रंप ने ट्वीट कर इससे खुद को अलग कर लिया और इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात के लिए सिंगापुर रवाना हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि अमेरिका ने बयान पर हस्ताक्षर नहीं करने का निर्णय लिया है क्योंकि कनाडा और अन्य पश्चिमी-यूरोपीय देश अमेरिकी किसानों, श्रमिकों और कंपनियों पर भारी शुल्क लगा रहे हैं, जबकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके लिए हमें दोषी बताया गया है।उन्होंने यह भी चेतावनी दे डाली कि उनकी सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी टैरिफ लगाने की तैयारी में है|

असल में त्रुदो ने शनिवार को कहा था कि कनाडा, यूरोपियन संघ और मैक्सिको से आयात होने वाले स्टील और एल्यूमिनियम पर लगाए गए शुल्क के बदले में अमेरिकी उत्पादों पर 1 जुलाई से शुल्क लगाया जाएगा| ट्रम्प प्रशासन द्वारा लिए इस फैसले को त्रुदो ने अमेरिका के साथ युद्द में हिस्सा ले चुके कनाडा के सैनिको का अपमान बताया और उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय व्यापार संधि के अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था| इसके बाद ट्रम्प ने उनके ऊपर ट्विटर पर एक के बाद एक ट्वीट किये|

ट्वीट में ट्रम्प ने लिखा कि जी-7 सम्मलेन में प्रधानमंत्री त्रुदो ने उनके प्रति बड़ा ही हल्का व्यवहार रखा और यह भी बताया कि हकीकत यह है कि कनाडा अमेरिका किसानों, मजदूरों और कंपनियों पर भारी टैरिफ लगा रहा है जिसके जवाब में त्रुदो के ऑफिस द्वारा ट्वीट किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ निजी व सार्वजानिक स्तरों पर पर एक सामान्य व्यवहार और बात रखी गई|

फ्रांस ने तटस्थ होते हुए इस घटना पर पहली प्रतिक्रिया दी है कि अन्तराष्ट्रीय सहयोग को क्रोध और टिप्पणियों द्वारा नहीं चलाया जा सकता है| बता दें कि जी-7 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल है लेकिन इसका असली नाम जी-8 था लेकिन रूस पर लगे प्रतिबन्ध के बाद से इसे जी-7 कहा जाता है | रूस ने भी इस मौके अपने रोष को प्रकट करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने अपने देश की आलोचना को रचनात्मक गपशप की संज्ञा दे डाली|

ऐसे में साफ़ देखा जा सकता है कि दुनिया सब कुछ तो ठीक बिलकुल भी नहीं चल रहा है| भारत की ओर से हम सर्वे भवन्तु सुखिन: का सन्देश देना चाहेंगे|

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