देश के निजी अस्पतालों में सजेरियन डिलीवरी हेतु सरकारी शर्ते ज़ारी

केंद्र सरकार की स्वास्थ संरक्षण मिशन के तहत जो निजी अस्पताल आते है उन्हें सजेरियन प्रक्रिया द्वारा बच्चे की डिलीवरी करवाने का लाइसेंस तभी मिलेगा जब मरीज को सरकार अस्पताल के द्वारा कारण का उल्लेख करने के साथ वहां भेजा गया हो |

नेशनल हेल्थ मिशन -आयुष्मान भारत अभियान के मुख्या कार्यकारी अधिकारी इन्दु भूषण के अनुसार इस फैसला का उद्देश्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा देना है हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर सामान्य प्रसव इस योजना के तहत नहीं आएगा |

इस योजना का उद्देश्य है प्रति परिवार को पाँच लाख का रुपये का कवरेज देना है जो सामाजिक और आर्थिक तौर पर असक्षम है | इसके तहत 10 करोड़ ऐसे परिवारों को चिन्हित किया गया है जिन्हे मेडिकल बीमा मिलेगा |

सजेरियन डिलीवरी निजी अस्पतालों में तभी संभव है जब सरकारी अस्पताल से रीज़न नोटिस के साथ मरीज को रेफेर किया गया हो | इस योजना के तहत सी-सेक्शन का शुल्क

9 ,000  रुपये तय किया गया है | वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार विश्व की औसत सी -सेक्शन दर  10 -15 फीसदी है जो की आदर्श है लेकिन भारत में निजी अस्पतालों के द्वारा यह दर 20 फीसदी को पार कर चुका है जो की चिंताजनक है क्योंकि इससे प्रसव के व्यवसायीकरण को जोर मिलेगा इसलिए इसकी रोकथाम के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है और उसे उम्मीद है की इससे परिवर्तन आएगा लेकिन निजी हेल्थ सेक्टर इस बात से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखता है और उसका प्रतिनिधिमंडल सरकार से जल्द मुलाक़ात करेगा और अपना पक्ष रखेगा ऐसे में देखना अहम हो जाता है कि सी-सेक्शन डिलीवरी पर तस्वीर साफ़ होती है या नहीं |

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram