भारत नहीं कर रहा अमेरिका के विरोध की परवाह, रूस से मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा भारत

भारत अपनी सुरक्षा को और भी मजबूत बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। जहां भारत शक्तिशाली अमेरिका देश के हस्तक्षेप के बावजूद रूस से सौदा करने को तैयार दिख रहा है। जी हां भारत ने रूस से एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल खरीदने के लिए कदम आगे बढ़ाएं हैं और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर निर्णय ले लिया जाएगा। जबकि अमेरिका इस सौदे को लेकर पहले ही इसको रद्द करने की मंशा जाहिर कर चुका है।

रक्षा मंत्रालय ने मंजूर किया प्रस्तावित बजट –

अमेरिका के विरोध के बावजूद इस सौदे में आ रही अड़चनों को निपटाते हुए रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे के लिए प्रस्तावित 39 हजार करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली डिफेंस एग्जीबिशन काउंसिल समिति ने एस 400 के सौदे से संबंधित विषयों की मंजूरी दे दी है। हाल ही में हुई रूस के साथ बैठक के बाद सुरक्षा संबंधी विषयों पर गहन चर्चा हुई थी जिसको लेकर यह निर्णय लिया गया था कि रूस के साथ एस-400 मिसाइल को खरीदने के लिए समझौता किया जाएगा । एस 400 मिसाइल को खरीदने की मंजूरी का मामला अब वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति के पास जाएगा जहां पर इसके इस सौदे को लेकर निर्णय लिया जाएगा ।

2016 में बनी थी सहमति –

इस सौदे को लेकर सहमति 2 साल पहले ही बन गई थी। जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और नरेंद्र मोदी की मुलाकात गोवा में हुई थी। इस मुलाकात के बाद नरेंद्र मोदी और व्लादिमिर पुतिन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। जिसमें कहा गया था कि भारत रूस से पांच, एस- 400 मिसाइल खरीदेगा। इस साल अक्टूबर में होने वाली मोदी पुतिन की मुलाकात के बाद यह सौदा अंतिम रूप में पहुंच जाएगा। इस मिसाइल के जरिए दुश्मनों के रणनीतिक जहाजों, जासूसी हवाई जहाज, ड्रोन को; 400 किलोमीटर की रेंज में नष्ट कर देगा जबकि हवा में 30 किलोमीटर की दूरी पर ही वह दुश्मनों को नस्तोनाबूद कर देगा।

मौजूदा समय में भारत और रूस अमेरिका की उस कानून की दूरी में रहना चाहते हैं जिसमें अमेरिका, अमेरिकी कानून काउंटरिंग अमेरिकाज अडवर्सरीज थ्रू सैंक्संस ऐक्ट (सीएएटीएसए) के वित्तीय प्रतिबंधों का प्रयोग करके अमेरिका दूसरे देशों को रूस से हथियार खरीदने से रोकने की मनाही करता है। जबकि अमेरिका ने इस सौदे को लेकर पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है और उसने कहा है कि इस सौदे को भारत आगे ना बढ़े अब देखना यह कि भारत देश के लिए क्या रणनीति तैयार करता है ताकि वह अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर इस सौदे को पूरा कर सके।

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