मीडिया की आज़ादी: चार सालों में भारत की सबसे खराब रैंकिंग, पाक से सर्फ एक पायदान ऊपर

प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत पहले के मुकाबले दो अंक नीचे खिसक कर 138वें स्थान पर पहुंच गया है। इसके लिये पत्रकारों के खिलाफ होने वाली हिंसा और हेट क्राइम को जिम्मेदार ठहराया।

वैश्विक संस्था रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (RSF) ने बुधवार को अपनी 2018 की रिपोर्ट में कहा, जब से नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने हैं, तब से हिंदू चरमपंथी, पत्रकारों से बहुत हिंसक तरीके से पेश आ रहे हैं। RSF ने इसके लिए पत्रकार और कार्यकर्ता गौरी लंकेश का उदाहरण दिया, जिनकी पिछले साल सितंबर में हत्या कर दी गई थी। हालांकि ये बात बता दे, की गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी।

रिपोर्ट में बताया गया, कि विश्व मीडिया इंडेक्स में नॉर्वे लगातार पहले नंबर पर बरकरार है। इससे पहले 2007 से 2012 तक नॉर्वे लगातार टॉप पर रहा था। वहीं उत्तर कोरिया में प्रेस की आवाज को सबसे ज्यादा दबाया जाता है,इसलिए वे सबसे नीचे हैं। इस लिस्ट में 180 देशों की रैंकिंग में भारत 138 वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत की इतनी बुरी रैंकिंग 2013 और 2014 में थी। तब भारत 140 नंबर पर था। 2017 में भारत 136वें पायदान पर पहुंच गया था। अब तक जारी हुई कुल 16 रैंकिंग में से 11 बार नॉर्वे ही नंबर एक रहा है। ब्रिटेन 40वें और अमेरिका 45वें स्थान पर है। ये रैंकिंग फ्रांस के एक एनजीओ “रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (RWB) ने जारी की है। RWB पिछले 16 साल से प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी कर रहा है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्‍थिति कैसी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। प्रेस की आजादी को जितना खतरा आज है, उतना पहले कभी नहीं था। इस गिरावट को रोकने की कोई कोशिश भी नहीं हो रही। प्रेस की आजादी को लेकर गिरती रैंकिंग की वजह मीडिया की मुख्य धारा में सेल्फ सैंसरशिप को माना जा रहा है। दरअसल, रिपोर्ट यह बताती है, कि भारत में प्रेस की आजादी पहले के मुकाबले कम हुई है।

इस एनजीओ के मुताबिक दुनिया में मीडिया की कमजोर होती स्थिति के लिए तीन सुपरपावर जिम्मेदार हैं- अमेरिका, रूस और चीन। 3 मई को पूरी दुनिया में वर्ल्‍ड प्रेस फ्रीडम डे मनाया जा रहा है।

– बीते छह साल तक पहले पायदान पर रहा फिनलैंड तीसरे नंबर पर पहुंच गया है।

– ब्रिटेन, अमेरिका और चिली दो-दो स्थान की गिरावट के साथ क्रमश:

–  न्यूजीलैंड आठ स्थान की गिरावट के साथ 13वें स्थान पर है।

-रूस में प्रेस की आजादी की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। वह पिछले साल की तरह 148वें स्थान पर ही बना हुआ है।

-भारत, रूस, चीन  इन देशों में मीडिया को निशाना बनाने की घटनाएं सामान्य हो गई हैं।

– भारत पाकिस्तान से मात्र तीन स्थान ऊपर है

– भारत के पड़ोसी देश नेपाल और भूटान प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत से कहीं अच्छे हैं।

– नेपाल को 84वां और भूटान को 100वां स्थान हासिल हुआ है।

– उत्तर कोरिया प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में आखिरी स्थान पर है।

यहां पर एक बात महत्वपूर्ण हैं, वह यह कि मौजूदा दौर की वेब पत्रकारिता यानी डिजिटल मीडया इस बिजनेस मॉडल से थोड़ी अप्रभावित है, क्योंकि इसे चलाने में कम खर्च होने के चलते इस पर दबाव कम रहता है। आज भी ज्यादातर पत्रकार बहुत ही ईमानदारी से काम करते हैं। हालांकि, कुछ लोग हैं, जो सारे पत्रकारों को एक ही श्रेणी में रखने की गलती कर रहे हैं।

हमारा देश एक बड़ा और लोकतांत्रिक देश है, प्रेस ही लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का काम करता है।  मीडिया का दायित्व है कि वह सरोकारों को दिखाये-पढ़ाये।

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