21वीं सदी की सबसे बड़ी घटना; उ. कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन, मून जे इन से मुलाकात करने दक्षिण कोरिया पहुँचे

   उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मुलाक़ात करने के लिए दक्षिण कोरिया पहुंच गए हैं। साल 1953 में कोरियाई युद्ध के बाद से लेकर ये पहला मौक़ा है, जब किसी उत्तर कोरियाई नेता ने पहली बार अपने देश का मिलिट्री बॉर्डर पार कर पड़ोसी देश दक्षिण कोरियाई ज़मीन पर पैर रखा है। उत्तर कोरियाई नेता कार से सीमा तक पहुंचे जहां से वो पैदल पीस हाउस तक पहुंचे। समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मून जे-इन ने किम जोंग-उन से कहा, “मैं आपसे मिलकर खुश हूं।” 

    दक्षिण कोरिया में लाखों लोगों ने टेलीविज़न पर इस ऐतिहासिक क्षण को देखा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक में कोरियाई युद्ध के कारण अलग हुए 60,000 लोगों और उनके परिवारों पर भी चर्चा होगी। साथ ही उत्तर कोरिया में हिरासत में रखे गए विदेशियों की रिहाई के बारे में भी चर्चा हो सकती है। इस मौक़े पर किम जोंग-उन और मून जे-इन ने चीड़ का पेड़ लगाया। इसके लिए दोनों देशों से लाई गई मिट्टी और पानी का इस्तेमाल किया गया।

     हालांकि, किम जोंग का दक्षिण कोरियाई नेता से मुलाकात के लिए तैयार होना पूरे विश्व के लिए हैरान करने वाली खबर थी। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को ‘इंटर कोरियन समिट का नाम दिया गया है। इस सम्मेलन की नींव तभी रखी गई थी, जब फरवरी के महीने में किम जोंग उन की बहन विंटर ओलंपिक्स में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण कोरिया आई थी। इस मीटिंग में किम जोंग उन दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना को हटाने पर भी जोर दे सकता है। 1950 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना दक्षिण कोरिया में तैनात है। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने दृढ़तापूर्वक घोषणा की, की अब दोनों देशों के बीच युद्ध खत्‍म होगा। इसलिए 27 अप्रैल की तारीख न सिर्फ कोरिया के बल्कि दुनिया के इतिहास में दर्ज हो गई है। किम के साउथ कोरिया जाने और राष्‍ट्रपति मून जे मुलाकात‍ करने की घटना को 21वीं सदी की अब तक की सबसे बड़ी घटना बताया जा रहा है। 

इस भेट की कुछ खास बातें

– किम जोंग ने अंदर जाने से पहले पीस हाउस की गेस्ट बुक में लिखा, “इतिहास के शुरुआती चरण और शांति के दौर में यहां से नया इतिहास शुरू होता है।”

– ये पहली बार है जब किम जोन्ग-उन बॉर्डर पार कर साउथ कोरिया गए हैं।

– पनमुंजोम दरअसल एक छोटा-सा गांव है। यहीं 1953 में कोरियन वॉर को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था।

     हालांकि दोनों देशों के बीच में एक रेखा खींची गई है, जिसका नाम हैं, डिमार्केशन लाइन। इस लाइन के उत्तर का हिस्सा उत्तर कोरिया के पास है और दक्षिण का क्षेत्र दक्षिण कोरिया का हिस्सा है। 250 किलोमीटर लंबे और करीब 04 किलोमीटर चौड़े इस जोन में दोनों देश अपनी सेनाओं या फिर सैनिकों को तैनात नहीं कर सकते हैं। ये पूरा इलाका यूएन यानि संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत आता है। यहां सिर्फ बिना हथियारों के साथ कुछ सैनिक रहते हैं।

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