28 साल बाद के संघर्ष के बाद सऊदी अरब में महिलाओं को मिला ड्राइविंग का अधिकार

सऊदी अरब में रविवार का दिन महिलाओं के लिए ऐतिहासिक है। यहां लंबे संघर्ष एक खुशखबरी पर समाप्त हुआ है। आज से महिलाएं ड्राइव करने में सक्षम होंगी। इस नई पहल के लिए देश में तैयारी चल रही है। प्रशासन महिला चालकों के लिए विशेष व्यवस्था करने में लगा हुआ है तो वहीँ पुलिस कानून प्रणाली को सुचारु बनाए रखने के लिए महिलाओं को  यातायात के नियमों को पढ़ाने की प्रक्रिया में भी है।

महिला चालकों की कार पार्किंग के लिए विशेष गुलाबी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि महिलाओं के लिए पार्किंग स्थल प्रवेश और निकास द्वार के पास हों। अनुमान के अनुसार वर्ष 2020 तक सऊदी अरब में 3 मिलियन यानी 30 लाख से अधिक महिला चालक होंगी।

संघर्ष की पृष्ठ्भूमि

1990 में 47 महिलाओं ने नियम तोड़ दिए और शहर में वाहन चलाए। सभी गिरफ्तार किए गए थे। सर्वोच्च धार्मिक संगठन ने अध्यादेश के द्वारा प्रतिबंध को सख्त किया| यूट्यूब में ड्राइविंग का वीडियो अपलोड करने के कारण महिला सामाजिक कार्यकर्ता मानल अल-शरीफ को जेल जाना पड़ा। वह वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में रह रहीं है। इसी प्रकार 2014 में लॉज़ेन अल-हैथलौल ने संयुक्त अरब अमीरात से सऊदी अरब तक ड्राइव करने की कोशिश की जिसके कारण उन्हें 73 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। 70 वर्षीय कार्यकर्ता अजीज़ा-अल-यूसुफ को भी जेल जाना पड़ा।

सितंबर 2017: सऊदी शाह सलमान ने 24 जून 2018 को प्रतिबंध हटाने की घोषणा की

अक्टूबर: महिलाओं को ड्राइविंग सिखाने के लिए प्रशिक्षण स्कूल  खोलना शुरू

जनवरी, 2018: जेद्दाह में महिलाओं की पहली कार शोरूम खुली

जून 2018 : महिलाओं के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनना शुरू हो गया

2018 से पहले मिले महिला अधिकार 

  • 1955 : पहली बार लड़कियों को स्कूल में दाखिला मिला
  • 1970 : महिलाओं के लिए विश्वविद्यालय खुला
  • 2001 : महिलाओं का पहचान पत्र बना
  • 2005 : जबरन विवाह पर प्रतिबंध लगाया गया
  • 2009 : पहली बार कोई महिला मंत्री (नौरा अल फायज) बनीं
  • 2012 : सारा अतर के रूप में पहली किसी सऊदी महिला ने ओलंपिक में हिस्सा लिया
  • 2013 : चुनिंदा क्षेत्र में महिलाओं को साइकिल व मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दी गई
  • 2015 : महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला
  • 2017 : साराह अल सुहामी सऊदी स्टॉक एक्सचेंज की पहली महिला अध्यक्ष बनीं

रसुल्लाह पैगम्बर मोहम्मद साहब के द्वारा दिखाए गए रास्ते पर आखिरकार चलते हुए सऊदी अरब ने महिलाओं को सम्मान व अधिकार देने की नायब पहल शुरू की है और खुद को रूढ़िवाद के ज़ंजीरो से आज़ाद कर नवीनता की ओर अग्रसर किया है जिससे अन्य मुस्लिम राष्ट्रों को सबक लेने की ज़रुरत है| याद रहे पुरुष-स्त्री बराबर है !

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