USA हुई UN के मानवाधिकार परिषद से बाहर, कहा ‘ढोंगी’ है यह संस्था

अमेरिका ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बाहर होने का ऐलान कर दिया। यूएन में अमेरिका की अम्बेस्डर निकी हेली ने परिषद पर मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले देशों का बचाव करने का आरोप लगाया। चीन, क्यूबा, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों का हवाला देते हुए हेली ने कहा कि, जब एक तथाकथित मानवाधिकार काउंसिल वेनेज़ुएला और ईरान में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में कुछ नहीं बोल पाती और कॉन्गो जैसे देश का अपने नए सदस्य के तौर पर स्वागत करती है, तो फिर यह मानवाधिकार काउंसिल कहलाने का अधिकार खो देती है। “परिषद में कई ऐसे सदस्य हैं, जो अपने नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकार की भी इज्जत नहीं करते, लेकिन परिषद उन देशों को बलि का बकरा बनाता है, जिन्होंने मानवाधिकार के मामले में अच्छा रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही उन्होंने कहा, ‘ऐसा करते समय मैं यह स्पष्ट रूप से कह देना चाहती हूं कि, अमेरिका का यह कदम मानवाधिकार प्रतिबद्धता से पीछे हटाना नहीं है।’ हालांकि निक्की हेली ने फिर इसमें शामिल होने की किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया। आपको बता दें की, अमरीका लंबे समय से 47 सदस्यीय इस परिषद में सुधार की मांग कर रहा था। इसके साथ ही यह तीसरी ऐसी घटना है, पेरिस जलवायु और ईरान परमाणु समझौते के बाद, जहाँ अमेरिका ने खुद को किसी बहुपक्षीय समझौते से अलग कर लिया है। यह फैसला सुनाते समय अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से देश के रक्षा मंत्री माइक पोम्पियो भी मौजूद थे। आपको बता दें की, अमेरिका ने पहले ही कहा था, “अगर मानवाधिकार नीति में कुछ देशों ने सुधार नही किया तो, अमेरिका इस परिषद से बाहर हो जायेगी। जिसके बाद कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक शीर्ष अधिकारी ने अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर आव्रजकों को उनके बच्चों से अलग करने की अमेरिकी नीति की आलोचना की थी। इस आलोचना के चलते ही अमेरिका का यह फैसला सामने आया है।

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के इस फैसले पर संयुक्त राष्ट्र ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि, अमेरिका को बाहर होने की बजाय दुनिया में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को देखते हुए अपनी संलग्नता को और अधिक बढ़ाना चाहिए। यूएनएचआरसी मानवाधिकारों की रक्षा की एक संस्था है। इसका उद्देश्य दुनिया में मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर नजर रखना है। इसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की जगह 2006 में बनाया गया था। भारत अभी इसका सदस्य नहीं है। अमेरिका करीब 3 साल से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य है और उनका डेढ़ साल का कार्यकाल ही अभी तक पूरा हुआ था।

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